SHG भवन ध्वस्तीकरण का NGT आदेश रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को संरक्षण देना संवैधानिक लक्ष्य

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी जिले के एक गांव में महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) के लिए बनाए गए भवन को जलाशय पर अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली सरकारी योजना के तहत बने इस भवन को गिराने का कोई औचित्य नहीं था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ गोपीनाथपुर ग्राम पंचायत समिति की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उड़ीसा हाईकोर्ट के जुलाई 2022 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें NGT के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ कोई राहत नहीं दी गई थी और अधिकारियों को remedial action लेने को कहा गया था।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने प्रश्न किया, “NGT सरकारी भवन को ध्वस्त करने का आदेश कैसे दे सकता है?” उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना स्वयं एक चुनौती है और इस प्रकार की याचिकाओं के माध्यम से विकास कार्यों को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

पीठ ने यह भी नोट किया कि भवन राज्य सरकार की ‘मिशन शक्ति’ योजना के तहत बनाया गया था, जिसका उद्देश्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सशक्त बनाना है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कहा गया कि विवादित स्थल एक जलधारा से संबंधित है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में विशेषज्ञ निकाय की सहायता लेना अपेक्षित था। न्यायालय ने पाया कि संबंधित धारा को गलत तरीके से “जलाशय” के रूप में वर्णित किया गया था।

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पीठ ने कहा, “ग्रामीण महिलाओं को स्व-रोजगार और स्थायित्व प्रदान करना एक संवैधानिक लक्ष्य है, और न्यायिक मंचों को भी इसका संरक्षण करना चाहिए।” न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल तभी उचित होगी जब कानून का “स्पष्ट और गंभीर उल्लंघन” हो।

न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता उसी क्षेत्र का निवासी था और भवन के निर्माण के बाद ही विवाद उठाया गया। रिकॉर्ड में कहीं यह नहीं दर्शाया गया कि भवन से जलधारा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही थी।

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पीठ ने कहा, “भवन के निर्माण के बाद इस प्रकार की याचिका स्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं था। इसलिए NGT का ध्वस्तीकरण आदेश और हाईकोर्ट का संबंधित आदेश टिक नहीं सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि यह वास्तव में प्रवाहित जलधारा है तो सभी हितधारकों—राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित—को विशेषज्ञों से परामर्श कर ऐसा तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे जल प्रवाह में कोई बाधा न हो। साथ ही स्पष्ट किया कि SHG भवन यथावत रहेगा।

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इस प्रकार, शीर्ष अदालत ने महिला स्वयं सहायता समूह के भवन को ध्वस्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए ग्रामीण महिला सशक्तिकरण से जुड़े ढांचों के संरक्षण पर बल दिया।

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