हाल ही में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि समाचार पत्र की रिपोर्ट एक कानूनी सबूत नहीं है जिसे शिकायतकर्ता के समर्थन में जांचा जा सकता है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3 (2) के तहत कथित रूप से प्रतिवादी नंबर 3 द्वारा
