फैंटेसी क्रिकेट कॉन्टेस्ट: वीजा हासिल करना विजेता की अपनी जिम्मेदारी, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने रद्द किया 2 लाख के मुआवजे का आदेश

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी प्रतियोगिता के विजेता के लिए यात्रा वीजा हासिल करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से विजेता की अपनी होती है, न कि पुरस्कार प्रायोजित करने वाले प्लेटफॉर्म की। इस टिप्पणी के साथ राष्ट्रीय आयोग ने फैंटेसी क्रिकेट प्लेटफॉर्म को 2 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने के राज्य और जिला उपभोक्ता मंचों के पुराने आदेशों को रद्द कर दिया।

जिला और राज्य आयोग के आदेश दरकिनार

एनसीडीआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. पी. साही और सदस्य भारतकुमार पंड्या की पीठ ने हरियाणा के जिला और राज्य उपभोक्ता आयोगों के पिछले फैसलों को ‘स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी’ करार दिया। आयोग ने अपने 22 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि प्रतियोगिता के नियमों के मुताबिक यात्रा वीजा की व्यवस्था करने का दायित्व केवल विजेता का था।

पीठ ने कहा कि यदि फैंटेसी प्लेटफॉर्म ने वीजा प्रक्रिया या कागजी कार्रवाई में विजेता की कोई सहायता की थी, तो इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि वीजा दिलाने की कानूनी जिम्मेदारी कंपनी पर आ गई। आयोग ने रेखांकित किया कि वीजा जारी करना संबंधित दूतावास का विशेषाधिकार है, न कि किसी कंपनी का। ऐसे में वीजा न मिलने पर कंपनी की ओर से की गई मदद को सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

वेस्टइंडीज टी20 फाइनल से जुड़ा है मामला

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यह पूरा विवाद साल 2018 में आयोजित एक ऑनलाइन प्रतियोगिता से शुरू हुआ था। फैंटेसी क्रिकेट प्लेटफॉर्म ने 24 नवंबर 2018 को वेस्टइंडीज में होने वाले आईसीसी महिला टी20 विश्व कप फाइनल के लिए यह कॉन्टेस्ट कराया था। इसके तहत विजेता को अपने किसी एक साथी के साथ मुकाबला देखने के लिए वेस्टइंडीज जाने का मौका मिलना था, जिसकी यात्रा की व्यवस्था कंपनी को करनी थी।

शिकायतकर्ता यह प्रतियोगिता जीत गया, लेकिन जरूरी वीजा न मिल पाने के कारण वह यात्रा का लाभ नहीं उठा सका। इसके बाद प्लेटफॉर्म ने सद्भावना दिखाते हुए उसे ऑस्ट्रेलिया या किसी अन्य देश में मैच देखने की वैकल्पिक यात्रा का प्रस्ताव दिया। शिकायतकर्ता ने इस नए प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कंपनी को कानूनी नोटिस भेजने के बाद उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।

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मंचों पर दोनों पक्षों की दलीलें

शिकायतकर्ता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता मंच ने 25 फरवरी 2020 को उसके पक्ष में फैसला सुनाया था और प्लेटफॉर्म को ठहरने व कानूनी खर्च के एवज में 2.05 लाख रुपये अदा करने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ कंपनी की अपील को हरियाणा राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी खारिज कर दिया था, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय आयोग पहुंचा।

राष्ट्रीय आयोग के समक्ष प्लेटफॉर्म के वकीलों प्रवीण महाजन और उत्कर्ष ने तर्क दिया कि नियमों के तहत वीजा दिलाने की कोई कानूनी जिम्मेदारी कंपनी की नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीजा न मिल पाना कंपनी के नियंत्रण से बाहर की बात थी और बाद में दिया गया वैकल्पिक यात्रा का प्रस्ताव केवल कारोबारी साख बनाए रखने की सद्भावनापूर्ण कोशिश थी, न कि अपनी गलती स्वीकार करना।

दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता के वकील अरिहंत जैन और उत्सव गर्ग ने दलील दी कि चूंकि कंपनी ने वीजा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया था और बाद में असुविधा के लिए खेद जताया था, इसलिए यह उसकी विफलता और सेवा में कमी की खुली स्वीकारोक्ति है।

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सद्भावना प्रस्ताव गलती की स्वीकारोक्ति नहीं

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राष्ट्रीय आयोग ने पाया कि निचली अदालतों ने प्रतियोगिता की शर्तों की पूरी तरह अनदेखी की थी। पीठ ने कहा कि प्लेटफॉर्म का वैकल्पिक प्रस्ताव सेवा में कोई कमी नहीं दर्शाता और न ही इसे अनुचित व्यापार व्यवहार कहा जा सकता है।

आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने अपनी मर्जी से इस वैकल्पिक भरपाई को ठुकराया था, जिसे निचली अदालतों ने गलत तरीके से कंपनी की कमी मान लिया। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान बिना किसी अनावश्यक परेशानी के तुरंत होना चाहिए। उपभोक्ता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य उपभोक्ता हेल्पलाइनों या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं।

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