सिओनी मालवा मॉब लिंचिंग फैसले के बाद जज को ऑनलाइन धमकियां, एफआईआर दर्ज, सुरक्षा बढ़ाई गई

मध्य प्रदेश में वर्ष 2022 के सिओनी मालवा मॉब लिंचिंग मामले में सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर धमकियां और आपत्तिजनक टिप्पणियां मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही न्यायाधीश की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

नर्मदापुरम जिले में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने 12 जून को ट्रक चालक शेख लाला नजीर अहमद की मॉब लिंचिंग के मामले में सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपने फैसले में अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे यह साबित कर दिया है कि सभी दोषी हमले में शामिल थे। अदालत ने यह भी कहा था कि मृतक के साथ “अत्यंत क्रूरता” की गई।

ऑनलाइन अभियान के बाद एफआईआर दर्ज

न्यायाधीश के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियान की शिकायत मिलने के बाद सिओनी मालवा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जो वैमनस्य फैलाने और लोक व्यवस्था के प्रतिकूल कृत्यों से संबंधित हैं।

नर्मदापुरम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक रंजन ने बताया कि अभी आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों का पता लगाने के लिए विभिन्न इकाइयों की मदद ली जा रही है। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रख रही है और यह भी जांच रही है कि इन पोस्टों के जरिए किस तरह की धारणा बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि न्यायाधीश की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

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फैसले के बाद शुरू हुआ विरोध और धमकियों का सिलसिला

फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट सामने आए, जिनमें न्यायाधीश को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया। कुछ वीडियो में लोगों को न्यायाधीश को धमकी देते और दोषियों की रिहाई के लिए समय-सीमा तय करते हुए देखा गया।

अन्य वीडियो और प्रदर्शनों में आरोप लगाया गया कि फैसला धर्म के आधार पर दिया गया और उम्रकैद की सजा रद्द करने की मांग की गई। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायाधीश के पुतले भी जलाए गए।

फैसले के तुरंत बाद अदालत परिसर के बाहर भी तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी, जब दोषियों के परिजनों ने उन्हें जेल ले जा रही पुलिस गाड़ी को रोकने की कोशिश की।

अदालत ने मॉब लिंचिंग को माना गंभीर परिस्थिति

सजा तय करते समय अदालत ने मॉब लिंचिंग को एक महत्वपूर्ण गंभीर परिस्थिति माना। अदालत ने कहा कि आरोपी घातक हथियारों से लैस होकर गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा बने और उन्होंने पीड़ितों पर हिंसक हमला किया।

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इस हमले में शेख लाला नजीर अहमद की मृत्यु हो गई थी, जबकि दूसरे पीड़ित शेख मुश्ताक घायल हुए थे।

पृष्ठभूमि

यह मामला 2 और 3 अगस्त 2022 की दरम्यानी रात का है। अभियोजन के अनुसार, शेख लाला नजीर अहमद और शेख मुश्ताक नर्दारवाड़ा से महाराष्ट्र की ओर मवेशी ले जा रहे थे। इसी दौरान सिओनी मालवा के बराखंड गांव के पास लाठी और लकड़ी के डंडों से लैस भीड़ ने उनके वाहन को रोक लिया।

अभियोजन के अनुसार, भीड़ ने दोनों पर गो-तस्करी के संदेह में हमला कर दिया। हमले में नजीर अहमद की मौत हो गई, जबकि मुश्ताक घायल अवस्था में बच गए।

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