केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी और उनकी कंपनी द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘द कारवा’ पत्रिका और उसके प्रधान संपादक को नोटिस जारी किया है। यह मामला बीफ और गोमांस के कारोबार से जोड़ने वाले लेखों और डिजिटल सामग्री से जुड़ा हुआ है।
अगली सुनवाई 31 अगस्त को
जस्टिस सब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने अंतरिम राहत की मांग करने वाली अर्जी पर सुनवाई करते हुए पत्रिका तथा उसके संपादक से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है। याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि पत्रिका को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से संबंधित विवादित सामग्री तुरंत हटाने का आदेश दिया जाए और भविष्य में ऐसे झूठे व मानहानिकारक दावे प्रकाशित करने से रोका जाए।
कंपनी का दावा: केवल शाकाहारी उत्पादों का व्यापार
निखिल गडकरी और उनकी फर्म सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का कहना है कि उनकी कंपनी केवल शाकाहारी कृषि-आधारित Commodities (वस्तुओं) के निर्माण और व्यापार में लगी हुई है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि कंपनी या निखिल गडकरी के पास बीफ, भैंस के मांस या किसी भी गोमांस उत्पाद के प्रसंस्करण, कटाई, व्यापार या निर्यात के लिए कोई लाइसेंस, परमिट या नियामक मंजूरी कभी नहीं रही है।
राजनीतिक कारणों से निशाना बनाने का आरोप
याचिका के अनुसार, 3 मार्च के आसपास द कारवा ने लेखों, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की एक श्रृंखला के जरिए निखिल गडकरी और उनकी कंपनी को गोमांस व्यापार से जोड़ने वाले भ्रामक दावे प्रसारित करना शुरू किया। निखिल गडकरी का आरोप है कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के पुत्र हैं।

