इंदौर की मासूम बच्ची के इलाज के लिए हाईकोर्ट गंभीर: 2 करोड़ रुपये की कमी पूरी करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

इंदौर की तीन वर्षीय बच्ची अनिका शर्मा के गंभीर आनुवंशिक रोग ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2’ के इलाज के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए हस्तक्षेप किया है। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए बच्ची के इलाज के लिए बचे हुए 2 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार दोनों को वित्तीय सहायता के रास्ते तलाशने को कहा है।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने बच्ची की ओर से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या वह इस बच्ची के इलाज में कोई वित्तीय मदद दे सकती है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से सीधे संपर्क स्थापित करे ताकि आगामी 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई से पहले उचित कदम उठाए जा सकें।

एम्स से प्रशासनिक अड़चन दूर करने के निर्देश

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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील अनुज भार्गव ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्हें एम्स नई दिल्ली की ओर से अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्हें यह भी बताया गया था कि वे इस मामले में संस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। इस प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने के लिए जस्टिस अभ्यंकर ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) सुनील जैन को निर्देश दिया कि वे खुद एम्स नई दिल्ली से आवश्यक निर्देश प्राप्त करें और कोर्ट में एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करें।

सात महीने के अभियान से जुटाए 7.50 करोड़ रुपये

अनिका के इलाज के लिए आवश्यक जीवन रक्षक इंजेक्शन की कुल लागत 9.50 करोड़ रुपये है। इस भारी-भरकम राशि को जुटाने के लिए बच्ची के परिवार और स्थानीय नागरिकों ने पिछले सात महीनों से एक व्यापक जन-अभियान चलाया है। इस मुहिम के जरिए अब तक 7.50 करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा पहले स्वीकृत किए गए 50 लाख रुपये भी शामिल हैं। हालांकि, इलाज शुरू करने के लिए अब भी 2 करोड़ रुपये की कमी बनी हुई है।

बेहद कीमती इंजेक्शन और समय की कमी

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अनिका के पिता प्रवीन शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उनकी बेटी की स्थिति लगातार नाजुक होती जा रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि उनकी बेटी को जल्द ही यह इंजेक्शन नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में उसका जीवन खतरे में पड़ सकता है। इस बीमारी के इलाज के लिए आवश्यक विशेष इंजेक्शन को अमेरिका से आयात करना होगा और इसे एम्स नई दिल्ली में ही बच्ची को दिया जाएगा।

क्या है एसएमए टाइप-2 बीमारी?

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स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशी (न्यूरोमस्कुलर) विकार है। इस बीमारी के कारण रीढ़ की हड्डी में मौजूद मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। इससे मस्तिष्क का शरीर की स्वैच्छिक मांसपेशियों से संपर्क टूट जाता है, जिसके परिणामस्वरूप मांसपेशियां कमजोर होकर सिकुड़ने लगती हैं। इस विकार से पीड़ित बच्चों को सामान्य रूप से रेंगने, चलने, निगलने और सांस लेने जैसी बुनियादी गतिविधियों में गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

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