[हेट स्पीच मामला] मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री पोनमुडी के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तमिलनाडु के मंत्री के. पोनमुडी के खिलाफ कथित हेट स्पीच (घृणा भाषण) को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की है। न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश की अगुवाई में अदालत ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि यह मामला आगे की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के. श्रीराम के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

यह कार्रवाई 8 अप्रैल को एक स्थानीय बैठक में पोनमुडी द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान से संबंधित है। 17 अप्रैल को अदालत में उस बयान का वीडियो एक वकील द्वारा प्रस्तुत किया गया, जब अदालत 2023 में पोनमुडी को आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी किए जाने के खिलाफ स्वत: संज्ञान से पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका भी न्यायमूर्ति वेंकटेश द्वारा ही शुरू की गई थी।

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न्यायमूर्ति वेंकटेश ने राज्य पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के हेट स्पीच से संबंधित दिशा-निर्देशों को लागू करने में असफल रही है, जबकि अदालत ने पहले ही एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने दलील दी कि पुलिस को पोनमुडी के बयान के संबंध में कई शिकायतें मिली थीं, लेकिन जांच के बाद उन्हें आपराधिक मुकदमा योग्य नहीं पाया गया। साथ ही, मदुरै खंडपीठ ने भी इन्हीं बयानों के खिलाफ दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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इसके बावजूद, न्यायमूर्ति वेंकटेश ने पोनमुडी के बयानों को तमिल से अंग्रेज़ी में अनुवादित करते हुए अदालत में पढ़ा और कहा कि इनमें धार्मिक समुदायों और यौनकर्मियों के प्रति अपमानजनक और घृणास्पद टिप्पणी की गई है, जो सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास है।

मंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि उक्त टिप्पणी एक दशकों पुरानी कहानी का हिस्सा थी और एक बंद बैठक में कही गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक रूप से प्रसारित वीडियो को संदर्भ से काट-छांट कर प्रस्तुत किया गया।

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हालांकि, अदालत ने हेट स्पीच के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देते हुए पोनमुडी के खिलाफ स्वत: संज्ञान की कार्यवाही औपचारिक रूप से दर्ज कर ली। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने पोनमुडी की दिसंबर 2023 की सजा और कारावास को अस्थायी रूप से स्थगित कर उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में पुनः कार्यभार संभालने की अनुमति दी थी।

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