मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को निर्देश दिया है कि वे ₹100 करोड़ के मानहानि मामले में सबूत के रूप में दाखिल की गई सीडी की सामग्री के अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन की लागत के तौर पर ₹10 लाख की राशि जमा करें। यह मामला सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार द्वारा 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले में धोनी का नाम जोड़ने के आरोपों से जुड़ा है।
जस्टिस आर. एन. मंजुला ने 11 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि कोर्ट के आधिकारिक इंटरप्रेटर द्वारा सीडी की सामग्री का अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन किया जा रहा है, और यह एक अत्यंत समय लेने वाला कार्य है जिसमें एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट की लगभग तीन से चार महीने की पूरी मेहनत लगेगी। इसलिए इसकी कुल लागत ₹10 लाख तय की गई है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
“इंटरप्रेटर से पता चला कि यह अत्यंत बड़ा कार्य है, जिसमें एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट की तीन से चार महीने तक की संपूर्ण मेहनत लगेगी।”
न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में वादी (plaintiff) को यह कार्य स्वयं करवा कर दस्तावेजों के साथ कोर्ट में प्रस्तुत करना होता है। लेकिन पूर्व में 28 अक्टूबर 2025 को दिए गए आदेश के अनुसार, विशेष परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट के इंटरप्रेटर की सहायता ली गई है, इसलिए खर्च वहन करना धोनी की जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि धोनी ₹10 लाख की राशि 12 मार्च 2026 तक मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड के खाते में जमा करें। इसके साथ ही इंटरप्रेटर को निर्देश दिया गया है कि वे अनुवाद कार्य मार्च के तीसरे सप्ताह तक पूरा कर लें।
मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
धोनी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार के खिलाफ ₹100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि कुमार ने 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले में धोनी का नाम जोड़कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया।
फिलहाल अनुवाद किए जाने वाली सीडी की भाषा स्पष्ट नहीं है, लेकिन कोर्ट ने माना है कि उसका ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद अत्यंत जटिल और समयसाध्य है, जिसके चलते यह खर्च तय किया गया है।

