महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने वर्ष 2003 में हुए एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली महिला के परिवार को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिकरण ने ट्रक मालिक और मोटरसाइकिल मालिक के विधिक उत्तराधिकारी को संयुक्त रूप से इस राशि के भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
यह आदेश MACT के न्यायाधीश के. पी. श्रीखंडे ने 5 मार्च को पारित किया। अधिकरण ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी तथा संबंधित वाहन मालिक मुआवजे की राशि मार्च 2024 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करें। अधिकरण ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं ने मामले का पर्याप्त तत्परता से पीछा नहीं किया, जिसके कारण कार्यवाही में काफी विलंब हुआ। आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध हुई।
यह मामला 18 सितंबर 2003 को कशीमीरा (ठाणे) स्थित मुंबई–अहमदाबाद हाईवे पर हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। मृतका सेरेना एम. परेरा (24) मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर यात्रा कर रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार ट्रक ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी।
टक्कर के बाद सेरेना सड़क पर गिर गईं और ट्रक के पहियों के नीचे आ गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उस समय वह एक ट्यूटर के रूप में कार्य करती थीं और उनकी मासिक आय लगभग ₹3,300 थी।
मृतका की माता और बहन ने मुआवजे के लिए दावा दायर किया था। हालांकि यह याचिका औपचारिक रूप से 2020 में पंजीकृत की गई।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि दुर्घटना उस समय हुई जब मोटरसाइकिल ठाणे म्यूनिसिपल ट्रांसपोर्ट (TMT) की बस और ट्रक के बीच फंस गई थी। उनका कहना था कि बस के अचानक ब्रेक लगाने से यह हादसा हुआ।
हालांकि अधिकरण ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायाधीश ने कहा कि बस के अचानक ब्रेक लगाने की कहानी पुलिस रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती और यह याचिकाकर्ता की कल्पना मात्र प्रतीत होती है।
साक्ष्यों के आधार पर अधिकरण ने ट्रक मालिक और मोटरसाइकिल मालिक के विधिक उत्तराधिकारी को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया, जबकि ठाणे म्यूनिसिपल ट्रांसपोर्ट (TMT) के खिलाफ दावा खारिज कर दिया।
अंततः अधिकरण ने आदेश दिया कि संबंधित पक्ष पीड़ित परिवार को ₹5 लाख मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करें।

