बार काउंसिल चुनावों की निगरानी कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए गठित उच्चस्तरीय चुनाव पर्यवेक्षण समिति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देशभर में बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए बनाई गई थी।

सोमवार को यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष उल्लेखित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा, जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं, ने अदालत से इस मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।

मिश्रा ने अदालत को बताया कि एक अधिवक्ता ने उस समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए नियुक्त किया था। उन्होंने कहा कि यह शिकायत इसलिए दर्ज कराई गई क्योंकि संबंधित वकील की अपील पर विचार नहीं किया गया था।

अदालत में मिश्रा ने कहा, “यह बेहद जरूरी मामला है। बार काउंसिल चुनावों की निगरानी कर रही हाई-पावर्ड कमेटी के खिलाफ एक वकील ने एफआईआर दर्ज करा दी है। यह गंभीर मामला है और केवल इसलिए हुआ क्योंकि उसकी अपील पर विचार नहीं किया गया। यह मामला महाराष्ट्र और गोवा राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़ा है।”

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस याचिका को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए जिस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, उसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया कर रहे हैं। इस समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि शंकर झा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि भी सदस्य हैं।

इससे पहले 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया था कि राज्य बार काउंसिल चुनावों से संबंधित याचिकाओं को सूचीबद्ध न किया जाए। अदालत ने कहा था कि ऐसे मामलों में शिकायत करने वाले पक्ष सीधे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के समक्ष अपनी शिकायतें रख सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में राज्य बार काउंसिल चुनावों को समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि सभी राज्य बार काउंसिल चुनाव सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की निगरानी में कराए जाएं और इसके लिए 31 जनवरी 2026 की अंतिम समयसीमा तय की गई थी।

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