केंद्र सरकार का बड़ा कदम: लोकसभा में 850 सीटों का प्रस्ताव, महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की तैयारी

केंद्र सरकार इस गुरुवार को संसद में ऐतिहासिक विधेयक पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य लोकसभा की सदस्य संख्या को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 करना है। राजनीतिक गलियारों में पिछले दो हफ्तों से चल रही अटकलों के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को अंजाम देना चाहती है। यह कदम 2026 तक सीटों के आवंटन पर लगी रोक को दरकिनार करते हुए देश के चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा।

550 सीटों की संवैधानिक सीमा को हटाना

प्रस्तावित कानून के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन किया जाएगा, जो लोकसभा सीटों के आवंटन को नियंत्रित करता है। वर्तमान में लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य हैं, जबकि संविधान के अनुसार इसकी अधिकतम सीमा 550 तय की गई है। नए प्रस्ताव के तहत सदन की कुल क्षमता 850 करने की योजना है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित होंगी।

16 अप्रैल से शुरू हो रहे तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले मंगलवार को सांसदों के साथ इन विधेयकों की प्रतियां साझा की गईं।

2011 की जनगणना का आधार

इस विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अनुच्छेद 82 के उस प्रावधान को हटाना है, जिसने 1971 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को स्थिर (Freeze) कर दिया था। 2001 के 84वें संशोधन अधिनियम के अनुसार, इन सीमाओं को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक नहीं बदला जा सकता था।

हालांकि, सरकार का तर्क है कि पिछले पांच दशकों में देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में व्यापक बदलाव आए हैं। विधेयक के ‘उद्देश्यों और कारणों’ के बयान में कहा गया है कि राज्यों के भीतर और राज्यों के बीच जनसंख्या का स्थानांतरण, तीव्र शहरीकरण और कुछ क्षेत्रों में असमान जनसंख्या वृद्धि ने निर्वाचन क्षेत्रों के बीच एक बड़ा असंतुलन पैदा कर दिया है। सरकार 2027 में पूरी होने वाली आगामी जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 के आंकड़ों का उपयोग कर तुरंत परिसीमन शुरू करना चाहती है।

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महिला आरक्षण की राह होगी आसान

लोकसभा सीटों के विस्तार का सीधा संबंध 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण अधिनियम) से भी है। इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है, जिसे परिसीमन के बाद ही लागू किया जाना था।

सरकार के अनुसार, अगली जनगणना और उसके बाद परिसीमन का इंतजार करने से महिलाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी में काफी देरी हो सकती है। 2011 के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होने से महिलाओं के लिए 33% कोटा प्रभावी रूप से और जल्दी लागू हो सकेगा।

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राजनीतिक और क्षेत्रीय चिंताएं

इस प्रस्ताव ने देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सोमवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा कि लोकसभा की सीटों में किसी भी प्रकार की वृद्धि न केवल गणितीय रूप से, बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होनी चाहिए।

विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों ने इस पर चिंता जताई है। जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले इन राज्यों को डर है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से उन्हें नुकसान होगा। उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक होने के कारण वहां सीटों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है, जिससे केंद्र की राजनीति में दक्षिण भारत का प्रभाव कम होने की आशंका है।

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गुरुवार से शुरू हो रहे संसद सत्र में इन संशोधनों पर चर्चा होगी, जिसे 1970 के दशक के बाद भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे में सबसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

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