समलैंगिक महिला को उसकी इच्छा के बिना पति या माता पिता के साथ रहने के लिए मजबूर नही किया जा सकता

राजधानी—- दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 वर्षीय समलैंगिक महिला के उसकी मर्जी बगैर एक पुरुष से जबरन शादी करवाने के विरुद्ध दाखिल याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने पीड़िता को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता महिला के ओर से वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट से कहा कि महिला का उसके परिजनों ने न सिर्फ जबरन विवाह करवाया बल्कि उसे पति के साथ वैवाहिक संबंधों में रहने के लिए मजबूर किया। साथ ही उसे अपनी यौन इच्छा और रुचि को बदलने के लिए उपाय अपनाने की भी धमकी दी गई। 

कोर्ट ने बताया कि महिला ने वैवाहिक रिश्ते समाप्त करने के लिए कई बार कोशिश की शादी के समय अपने समलैंगिक होने की बात भी पति को बता दी थी। और तलाक की अर्जी देने के लिए भी कहा था। लेकिन पति तलाक के लिए टालमटोली करता रहा। महिला के परिजनों ने भी समलैंगिकता के आधार पर तलाक लेने पर समाज मे उनकी बदनामी और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की बात कहकर पति के साथ रहने के लिए विवश किया। जिससे महिला मानसिक और शारिरिक रूप से आघात झेलती रही। 

महिला को जब इस समस्या का कोई समाधान नजर नही आया तो वह  7 मार्च को चकमा देकर अपने ससुराल से भागने में कामयाब रही। महिला ने एक एनजीओ से मदद की गुहार लगाई। एक अन्य एनजीओ द्वारा महिला को आश्रय देने के बाद महिला के परिजन भी वहाँ पहुँच गए। और महिला को उनके हवाले करने की मांग करने लगे। 

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कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वयस्क महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ पति या माता पिता के घर मे रहने के लिए मजबूर नही किया जा सकता साथ ही दिल्ली पुलिस को महिला को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। 

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