हाल ही में, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि क्षेत्राधिकार प्रदान करना एक विधायी कार्य है और इसे न तो पार्टियों की सहमति से और न ही किसी श्रेष्ठ न्यायालय द्वारा प्रदान किया जा सकता है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय की खंडपीठ कलेक्टर-सह-अपीलीय अधिकरण, जिला दुर्ग (छ.ग.) के न्यायालय द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने
