अपने मुवक्किल द्वारा फीस ना देने के लिए उसका अपहरण करने के आरोपी वकील की जमानत मंजूर

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के एक अधिवक्ता (विमलचंद्र उमेशचंद्र झा) को जमानत दे दी है, जिन्हें एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर वकील को मुवक्किल द्वारा फीस ना देने पर पर प्रताड़ित करने और अपहरण करने का आरोप है।

एडवोकेट झा के खिलाफ आईपीसी की धारा 364(ए) 365, 387, 323 और 506 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

दर्ज एफआईआर के मुताबिक, झा ने अपने मुवक्किल नवनाथ गोले को तीन करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए दबाव बनाने के लिए अपहरण कर लिया था।

जस्टिस सारंग वी कोतवाल ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि भले ही जांच अभी भी चल रही थी, प्राथमिकी में उल्लिखित घटना के बारे में कुछ गंभीर संदेह पैदा होता है।

रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों और वकील की दलीलों पर गौर करने के बाद, कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद को तैयार कर लिया था और उसके पास अपने विचार रखने के लिए पर्याप्त समय होने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसलिए कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।

वकील को एक लाख रुपये के निजी मुचलके, पर रिहा कर दिया गया और उसे अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी के पास जमा करने का निर्देश दिया गया है। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद हर महीने एक बार चार्जशीट दाखिल होने तक उन्हें दो बार जांच एजेंसी के पास आने का भी निर्देश दिया गया है।

वकील ने कहा कि कथित पीड़ित को सीसीटीवी के साथ भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाया गया और किसी भी फुटेज में यह नहीं दिखाया गया कि मुवक्किल दबाव में था। कोर्ट ने इस बयान से सहमति जताते हुए कहा कि अपहरण के बाद पीड़िता को भीड़भाड़ वाली जगह पर ले जाने का कोई कारण नहीं था|

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दूसरी ओर, राज्य के वकील ने तर्क दिया कि क्योंकि मामला एक नई जांच एजेंसी को स्थानांतरित कर दिया गया है, और उन्हें मामले की जांच के लिए समय दिया जाना चाहिए।

हालांकि, कोर्ट ने इस अनुरोध पर विचार करने से स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि वकील कोविड से संक्रमित था और उसे गुर्दे की बीमारी थी, जमानत देने के लिए एक उपयुक्त मामला है।

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