केरल हाईकोर्ट ने साल 2017 के बहुचर्चित अभिनेत्री अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में दो दोषियों की 20 साल की जेल की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने अपराध की गंभीर प्रकृति और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला देते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
साजिश और सबूतों पर हाईकोर्ट का रुख
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की पीठ ने मामले के पांचवें आरोपी सलीम एच और छठे आरोपी प्रदीप की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। दोनों दोषियों ने अपनी दोषसिद्धि और 20 साल के कारावास के खिलाफ दाखिल अपीलों पर अंतिम निर्णय आने तक सजा स्थगित करने और जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी।
मामले के रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस बात के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं कि सभी छह आरोपियों ने मिलकर साजिश रची और उसे पूरी सटीकता के साथ अंजाम दिया। पीठ के अनुसार, सलीम और प्रदीप ने इस अपराध में अन्य आरोपियों की सक्रिय रूप से मदद की और वे इस पूरी साजिश में बराबर के भागीदार थे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता सत्र अदालत के फैसले में कोई ऐसी गंभीर अवैधता या बड़ी खामी साबित करने में नाकाम रहे हैं, जिसके आधार पर इस चरण में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जा सके।
जनहित और सामाजिक प्रभाव
हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस मामले में राहत देने से इनकार करने के पीछे समाज पर इस अपराध का असर, व्यापक जनहित और न्याय प्रशासन में आम लोगों का विश्वास बनाए रखना जैसे बड़े कारण शामिल हैं। पीठ के अनुसार, सत्र न्यायाधीश द्वारा दर्ज निष्कर्षों को अनुचित या तर्कहीन नहीं कहा जा सकता।
मामले का इतिहास और अन्य आरोपी
यह मामला 17 फरवरी 2017 का है, जब त्रिशूर से कोच्चि जा रही एक बहुभाषी अभिनेत्री का चलती गाड़ी में अपहरण कर यौन उत्पीड़न किया गया था। पिछले साल 12 दिसंबर को सत्र अदालत ने मुख्य आरोपी सुनील एन एस उर्फ पल्सर सुनी, सलीम और प्रदीप समेत छह लोगों को सामूहिक दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 20-20 साल की कैद की सजा सुनाई थी। वहीं, अभिनेता दिलीप और तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को मुख्य आरोपी पल्सर सुनी की सजा निलंबित करने की याचिका भी खारिज कर दी थी।

