कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें हाल ही में संपन्न हुई SSLC परीक्षा के मूल्यांकन के लिए नई ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने की अनुमति मांगी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद मूल्यांकन के नियमों में बदलाव करना कानूनी रूप से गलत है। अब छात्रों को उनके तीसरे विषय (Third Language) में ग्रेड के बजाय पहले की तरह अंक दिए जाएंगे।
विवाद की शुरुआत 27 मार्च को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री बंगारप्पा की एक घोषणा से हुई थी। उन्होंने कहा था कि इस शैक्षणिक वर्ष से SSLC परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए अंकों की व्यवस्था खत्म कर ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नए प्रस्ताव के तहत तीसरी भाषा के ग्रेड छात्र के कुल परिणामों (Final Marks) में नहीं जोड़े जाने थे।
गौर करने वाली बात यह है कि यह घोषणा तब की गई जब SSLC की परीक्षाएं 18 मार्च से 2 अप्रैल के बीच चल रही थीं। इसके खिलाफ तीन छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि परीक्षा शुरू होने के बाद मूल्यांकन के नियम बदलना छात्रों के साथ अन्याय है।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एडवोकेट जनरल शशी किरण शेट्टी ने सरकार के इस कदम का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में छात्र तीसरी भाषा (जैसे हिंदी) में फेल हो रहे थे, जिसके कारण छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा था। सरकार का उद्देश्य इस दबाव को कम करना था। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार नियमों में संशोधन के लिए मसौदा तैयार कर रही है।
जस्टिस ई.एस. इंदिरेश की एकल पीठ ने सरकार की प्रक्रिया पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने पाया कि सरकार ने परीक्षा शुरू होने से पहले न तो कोई नियम बनाया और न ही कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
जस्टिस इंदिरेश ने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाए जिसमें फेल होने वाले छात्रों का हवाला दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा में 83 प्रतिशत छात्र पहले ही पास हो चुके हैं। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा, “अगर सरकार की मंशा सबको पास करने की ही थी, तो फिर परीक्षा आयोजित ही क्यों की गई?” हाईकोर्ट ने दोहराया कि परीक्षा की अधिसूचना जारी करने से पहले ही मूल्यांकन के मापदंड स्पष्ट होने चाहिए थे।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए पुराने नियमों के तहत ही मूल्यांकन करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि खेल शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जा सकते। इस फैसले के बाद, शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की अधिसूचना के मानकों के अनुसार ही हालिया परीक्षाओं का परिणाम घोषित किया जाएगा।
