बेंगलुरु कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सामने आए सोना तस्करी के एक बड़े मामले में आरोपी केबिन क्लीनर के खिलाफ दर्ज सीमा शुल्क (कस्टम्स) केस रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी संगठित सिंडिकेट से जुड़े मामले में केवल आरोपी के पास से सीधे तौर पर माल की बरामदगी न होना ही उसकी संलिप्तता खारिज करने की एकमात्र कसौटी नहीं हो सकता।
28 अगस्त को पारित अपने आदेश में जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि जब सोने की तस्करी संगठित नेटवर्क के जरिए की जाती है, तो इसका सीधा असर देश के आर्थिक हितों पर पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि तस्करी की ऐसी सुनियोजित श्रृंखला में—जहां एक व्यक्ति सोना विमान के अंदर लाता है, दूसरा उसे छिपाता है, तीसरा उसे निकालता है, चौथा प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर ले जाता है और पांचवां उसे हासिल करता है—हर कड़ी के हाथ से सीधे जब्ती की अनिवार्यता जांच के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देगी।
विमान में सीट के नीचे छिपाकर लाए थे दो किलो सोना
सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, यह मामला जेद्दा से बेंगलुरु आई सऊदी एयरलाइंस की एक उड़ान से जुड़ा है। इसमें सीट नंबर 39ए पर सवार यात्री ने 1-1 किलोग्राम के दो सोने के बार (कुल 2 किलो सोना) को एक ग्रे पैकेट में लपेटकर सीट के नीचे छिपा दिया था।
आरोप है कि विमान उतरने के बाद सफाई कर्मचारियों ने वह पैकेट निकाला, उसे कचरे और सफाई सामग्री के बीच छिपाया और रनवे व प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर पहुंचा दिया। इसके बाद सोने की यह खेप आगे किसी अन्य व्यक्ति को सौंपी जानी थी। विभाग का आरोप है कि याचिकाकर्ता नंदीशा एन. ने विमान की सफाई की थी और सोने को हवाई अड्डे के परिसर से बाहर निकालने में मदद की थी।
आरोपी की दलील: जीप से मिला सोना, मेरा कोई हाथ नहीं
याचिकाकर्ता नंदीशा एन. को सोने की बरामदगी के बाद जून 2025 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उसे जमानत मिल गई थी। उसने कस्टम्स एक्ट के तहत दर्ज मामले को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
नंदीशा ने खुद को निर्दोष बताते हुए दलील दी कि वह केवल विमान की सफाई कर अपनी आजीविका चलाता है। उसने कहा कि अधिकारियों ने तस्करी का सोना हवाई अड्डे के बाहर खड़ी एक जीप से बरामद किया था, न कि उसके पास से। इसलिए उसके खिलाफ दर्ज मामला रद्द किया जाना चाहिए।
जांच शुरुआती चरण में, शोकॉज नोटिस फैसला नहीं: हाईकोर्ट
कस्टम्स विभाग की ओर से पेश वकील मधु एन राव ने अदालत को बताया कि सीमा शुल्क विभाग और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) अभी इस पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने आरोपी को केवल कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया है ताकि सिंडिकेट में उसकी सटीक भूमिका का पता लगाया जा सके।
हाईकोर्ट ने कहा कि शोकॉज नोटिस केवल जवाब मांगने का जरिया है, यह किसी के दोषी होने का अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने रेखांकित किया कि वैधानिक जांच के शुरुआती चरण में ही कार्यवाही में हस्तक्षेप करना कानून सम्मत प्रक्रिया को शुरू में ही रोकने जैसा होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की वास्तविक भूमिका और संलिप्तता आगे की जांच और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।

