नकली दवाओं का मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट ने दो वितरकों के दवा लाइसेंस रद्द और निलंबित करने के आदेश पर लगाई अंतरिम रोक

बेंगलुरु — कर्नाटक हाईकोर्ट ने कथित तौर पर नकली दवाइयों के कारोबार से जुड़े एक मामले में दो वितरकों—फॉर्च्यून मेडिकल सॉल्यूशंस और विवान्ता फार्मास्यूटिकल्स—के खिलाफ राज्य औषधि नियामक की दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद दोनों कंपनियों को कानूनी शर्तों के तहत फिलहाल अपना कारोबार दोबारा शुरू करने की अनुमति मिल गई है।

जस्टिस सी एम पूनाचा की एकल पीठ ने निर्देश दिया कि दोनों वितरक 9 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई तक कानून के दायरे में रहकर अपना दवा वितरण कार्य जारी रख सकते हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम रोक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) को कानून के तहत जरूरी कदम उठाने से नहीं रोकती, बशर्ते याचिकाकर्ता वितरक किसी भी वैधानिक जांच प्रक्रिया में अधिकारियों को पूरा सहयोग दें।

हाईकोर्ट ने इस मामले में FSDA और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर औपचारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर तय की गई है। सुनवाई के दौरान अपर सरकारी अधिवक्ता राहुल करियप्पा ने अदालत को जानकारी दी कि इसी कार्रवाई के खिलाफ अन्य दवा कंपनियों द्वारा दायर की गई 16 याचिकाओं पर भी 9 अक्टूबर को एक साथ सुनवाई की जाएगी।

विवान्ता फार्मा ने कार्रवाई को बताया मनमाना और अत्यधिक

नियामक के आदेश को चुनौती देते हुए विवान्ता फार्मास्यूटिकल्स ने दलील दी कि उस पर लगे आरोप केवल ‘जैविसेफ्टा’ (Zavicefta) इंजेक्शन के कुछ खास बैचों तक सीमित थे। कंपनी का तर्क था कि सीमित आरोपों के आधार पर उसके सभी दवा लाइसेंस निलंबित कर पूरे कारोबार पर पाबंदी लगाना अत्यधिक, मनमाना और गैर-आनुपातिक कदम है, जिससे उसके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।

READ ALSO  अदालत की अनजाने में हुई गलती का खामियाजा कोई पक्षकार नहीं भुगत सकता: सुप्रीम कोर्ट

नियम 66 के उल्लंघन पर 24 फर्मों पर गिरी थी गाज

हाईकोर्ट का यह आदेश FSDA द्वारा 18 सितंबर को की गई व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई के बाद आया है। नियामक ने बेंगलुरु भर की 16 खुदरा और थोक दवा फर्मों के लाइसेंस रद्द कर दिए थे, जबकि वैश्विक दवा निर्माता कंपनी फाइजर (Pfizer) के एक स्थानीय डिपो सहित आठ अन्य फर्मों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।

प्रशासन ने यह कार्रवाई औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली, 1945 के नियम 66 के उल्लंघन के आधार पर की थी। इस नियम के तहत किसी भी लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का उचित अवसर दिया जाना अनिवार्य है।

फार्महाउसों पर छापेमारी से फूटा था नकली दवाओं का सिंडिकेट

दवा कंपनियों के खिलाफ यह कार्रवाई 18 अगस्त को बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी और दोद्देरी इलाकों में स्थित फार्महाउसों पर मारे गए छापों के आधार पर की गई। इन छापों में करीब 5 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली दवाएं, जाली बिलिंग रसीदें, इंजेक्शन भरने वाली मशीनें और नकली लेबल बरामद हुए थे। इसके बाद पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।

FSDA की जांच के अनुसार, इन फार्महाउसों का इस्तेमाल अवैध रिपैकेजिंग केंद्रों के रूप में किया जा रहा था। गिरोह पड़ोसी राज्यों से सस्ती दवाएं मंगवाता था और उन्हें नई कांच की शीशियों में भरकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के महंगे जीवनरक्षक ब्रांडों—विशेषकर फाइजर के आयातित उत्पादों—के नाम पर फर्जी लेबल लगा देता था।

READ ALSO  POCSO मामले में 80 वर्षीय आरोपी को कलकत्ता हाईकोर्ट से सशर्त जमानत, न्यायालय ने उम्र और लंबी हिरासत को ध्यान में रखा

नियामक ने पाया कि खरीदारों को भ्रमित करने के लिए इन नकली शीशियों पर जो क्यूआर कोड लगाए गए थे, वे स्कैन करने पर काम ही नहीं करते थे। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि इन नकली फॉर्मूलेशन में कोई भी मुख्य सक्रिय औषधीय घटक (API) मौजूद नहीं था और इनमें गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करने वाले हानिकारक तत्व हो सकते हैं।

छापेमारी में बरामद दवाइयों और मशीनों का ब्योरा

जांच अधिकारियों ने अगस्त की छापेमारी में बड़े पैमाने पर जाली दवाएं जब्त की थीं। बरामदगी का सबसे बड़ा हिस्सा ‘यूक्रेटिया हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से बेची जा रही नकली ‘सेफियाविजेंट 2.5’ इंजेक्शन की 5,640 शीशियां थीं, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य 3.38 करोड़ रुपये से अधिक है।

इसके अलावा, वेलक्योर रेमेडीज के नाम से तैयार 1,531 शीशियां ‘हिजलाम’ इंजेक्शन (कीमत 52.24 लाख रुपये) और फाइजर की नकल वाले ‘एम्ब्लावेओ’ की 264 शीशियां (कीमत 20.59 लाख रुपये) पकड़ी गईं। अधिकारियों ने 35 लाख रुपये मूल्य की एक्सपायर हो चुकी दवाओं के 30 बॉक्स भी बरामद किए, जिन्हें दोबारा बाजार में उतारने की तैयारी थी। इसके साथ ही जाविटाज़, जैविसेफ्टा, टिगिन्टा, टिग्विनेट, एज़्ट्रियो और ट्रेज़ाम के संदिग्ध बैच, एक स्वचालित इंजेक्शन-फिलिंग मशीन और बड़ी तादाद में जाली मुहरें व लेबल जब्त किए गए थे।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तेलंगाना हाईकोर्ट के तीन जजों को स्थायी दर्जा देने की सिफारिश की

प्रभावित दवा कंपनियों और प्रतिष्ठानों की सूची

FSDA ने जिन 14 फर्मों के लाइसेंस रद्द किए थे, उनमें अवेस्को हेल्थकेयर, बैंगलोर स्पेशियली फार्मा, पटेल मेडी ट्रेड, राजराजेश्वरी फार्मा, सूर्या स्पेशियल्टी फार्मा, एसडब्ल्यूएस फार्मा, कृपा हेल्थकेयर, सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल ड्रग सेंटर, सागर फार्मा, जाइमस फार्मा, फॉर्च्यून मेडिकल सॉल्यूशंस, एक्सेलकेयर फार्मा, पटेल मेडिकल और चामराजपेट स्थित बैंगलोर स्पेशियलिटी फार्मा का आउटलेट शामिल हैं।

वहीं, जिन आठ फर्मों के लाइसेंस निलंबित किए गए थे, उनमें मेड फार्मा, सूर्या स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, सागर फार्मा (यूनिट-2), विवान्ता फार्मास्यूटिकल्स, मारुति मेडिकल, बेलगावी स्थित विवा फार्मा, हाई-5 फार्मा और फाइजर शामिल हैं।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles