बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका दाखिल करने के लिए A4 शीट कागज के प्रयोग को अनुमति दी

महाराष्ट्र—-बॉम्बे हाई कोर्ट ने कागज का प्रयोग कम करने और भंडारण की समस्या से निजात पाने के लिए कोर्ट की सभी पीठो में दोनों ओर प्रिंट किया गए कागज की ए4 शीट के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।

हाई कोर्ट के अधिवक्ता अजिंक्या उड़ाने की जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया। अधिवक्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि सभी न्यायिक और प्रशासनिक कार्यो के लिए वर्तमान में केवल एक ही तरफ प्रिंट किये गए बड़े आकार के कागज का इस्तेमाल किया जा रहा है और उसकी जगह पर ए4 शीट का उपयोग किया जाए तो कागज की बचत होगी। जिससे कम पेड़ काटने पड़ेंगे और कोर्ट में भंडारण का स्थान भी बचेगा। 

हाई कोर्ट प्रशासन की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता एसआर नारगोलकर ने चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की पीठ को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट नियमो में संशोधन करते हुए दोनों ओर प्रिंट हुए उच्च गुणवत्ता वाले ए4 शीट के प्रयोग की अनुमति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। 

नारगोलकर ने कोर्ट को बताया कि उक्त अधिसूचना 6 जुलाई को गजट में प्रकाशित भी हो गई है। उन्होंने कहा इस अधिसूचना को जारी होने के आलोक में याचिका दायर करने वाले की समस्या का समाधान हो गया है। 

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1 COMMENT

  1. Why Govt. State or centre is to be blamed for less number of vaccination,if it cannot be enforced? It is for Judiciary to criticize but give solutions. If death occurs why compensation because it was invited voluntarily. The Judiciary appears to be in the role of opposition.The object of Govt. is to save the life of its citizens and stop further spread of this pandemic. In this country even people don’t bear mask what to talk about vaccination. The Judiciary must give a judicious decision. Words like freedom, liberty are meant for people who are alive including employment, profession or business. So vaccination may be made as condition of employment. No control, no obedience from the people

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