जमानत मिलने के बाद आरोपी को पता ही नही चला- 1 साल से ऊपर जेल में काटे, अब हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

चंडीगढ़—–पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में एक अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया है जहां आरोपी को 13 फरवरी 2020 को सीजेएम कोर्ट ने जमानत दे दी और याची को इसकी जानकारी तक नही हुई।इसके बाद याचिकाकर्ता सेशन जज के पास पहुँचा वहां उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अब मामला हाई कोर्ट पहुँचा तो कोर्ट ने पंचकूला के सेशन जज और डायरेक्टर प्रोस्जिक्यूटरसे जबाब तलब कर लिया है।

पंचकूला सेक्टर 5 में दर्ज एक मामले में जमानत के लिए निशांत ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर 14 सितंबर को सुनवाई निर्धारित की थी।इसी बीच याचिकाकर्ता के पक्षकार अधिवक्ता ने अर्जी दाखिल कर बताया कि याची को सीजेएम कोर्ट से 13 फरवरी 2020 को ही जमानत मिल चुकी है और ऐसे में वह मुख्य याचिका पर जल्द सुनवाई और याचिका वापस लेने की अनुमति चाहते है। 

हाई कोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए जब रिकॉर्ड देखा तो पाया कि सीजेएम ने उसे जमानत दे दी थी और आदेश में याची के वकील की उपस्थिति दर्ज थी। लेकिन इस बारे में याची को जानकारी ही नही थी और उसने सेशन जज के पास अपील दाखिल कर दी।

हैरानी की बात तो यह रही की सेशन जज ने भी सीजेएम के आदेश पर ध्यान नही दिया और न तो याची के अधिवक्ता ने और न ही सरकारी वकील ने सेशन जज को इस बारे में अवगत करवाया। सरकार की तरफ से दाखिल एफिडेविट में भी इसकी जानकारी नही थी जिसके बाद सेशन जज ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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अब याचिकाकर्ता ने नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस लापरवाही के चलते एक ओर जहां सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट का वक्त बर्बाद हुआ तो वहीं याची को जमानत के बाद भी 1 साल 4 माह जेल में काटने पड़े। 

कोर्ट ने इस मामले में सेशन जज से रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही हरियाणा के डायरेक्टर प्रोसीक्यूशन से जवाब तलब किया है कि इस सब के लिए कौन जिम्मेदार है।

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