शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध के लिए महिला के खिलाफ बीएनएस की धारा 69 लागू नहीं हो सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) की धारा 69 के तहत धोखे से बनाए गए यौन संबंध का अपराध किसी महिला के खिलाफ लागू नहीं हो सकता। अदालत ने एक अन्य महिला से शादी का झूठा वादा करने के आरोपी व्यक्ति की पत्नी के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्रवाई को आंशिक रूप से खारिज कर दिया। एकल पीठ के जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े ने पत्नी द्वारा दायर याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्णय दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ बीएनएस की धारा 69 का आरोप रद्द किया जाता है, हालांकि अनधिकृत डेटा ट्रांसफर और धमकी के आरोपों की पुलिस जांच जारी रहेगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के तहत लागू) के अंतर्गत दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में बेंगलुरु के सुब्रमण्यपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और शिकायत (अपराध संख्या 185/2026) को रद्द करने की मांग की गई थी। यह मामला बीएनएस की धारा 69, 308(2), 351(2) सपठित धारा 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 की धारा 66ई व 67ए के तहत बेंगलुरु के 30वें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, याचिकाकर्ता और उसके पति (आरोपी नंबर 1) ने उसे बताया था कि उनके वैवाहिक संबंध अच्छे नहीं हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता का परिचय आरोपी नंबर 1 से हुआ और दोनों में संबंध बन गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी नंबर 1 ने उससे शादी करने का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी नंबर 1 और आरोपी नंबर 2 (याचिकाकर्ता) ने उसकी कई तस्वीरें और वीडियो बनाए और उसकी सहमति व जानकारी के बिना उन्हें अन्य लोगों को भेज दिया। इसके अलावा दोनों आरोपियों पर शिकायतकर्ता को ब्लैकमेल करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया था।

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आरोपी नंबर 1 की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है और दोनों के विवाह को 11 वर्ष हो चुके हैं। साथ ही आरोपी नंबर 1 इस वर्तमान याचिका में पक्षकार नहीं है। वकील ने कहा कि बीएनएस की धारा 69 याचिकाकर्ता पर लागू नहीं होती और उसने किसी भी व्यक्ति को कोई डेटा नहीं भेजा है।

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वकील ने आगे तर्क दिया कि यदि आरोपी नंबर 1 और शिकायतकर्ता के बीच उनके कथित संबंधों को लेकर कोई विवाद है, तो इसके आधार पर कानूनी रूप से विवाहित पत्नी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। यह भी कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता के मोबाइल फोन से कोई फोटो भेजी भी गई थी, तो संभव है कि किसी ने उसके फोन का दुरुपयोग किया हो और ऐसे दुरुपयोग के लिए याचिकाकर्ता पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

याचिका का विरोध करते हुए हाईकोर्ट के सरकारी वकील ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच के दौरान पुलिस को ऐसी सामग्री मिली है जिससे संकेत मिलता है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता की सहमति और जानकारी के बिना उसके फोटो और वीडियो भेजे थे।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी और विश्लेषण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता एक महिला है और उसे आरोपी नंबर 2 बनाया गया है, ऐसे में बीएनएस की धारा 69 का अपराध उस पर लागू नहीं हो सकता। पीठ ने टिप्पणी की:

“निसंदेह, याचिकाकर्ता एक महिला है और उसे आरोपी नंबर 2 बनाया गया है। याचिकाकर्ता के खिलाफ बीएनएस, 2023 की धारा 69 के तहत अपराध लागू नहीं हो सकता और शिकायत के आरोप भी याचिकाकर्ता द्वारा ऐसा कोई कृत्य किए जाने का संकेत नहीं देते हैं।”

तस्वीरों के अनधिकृत प्रसारण के आरोपों पर पीठ ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसी सामग्री मौजूद है जो शिकायतकर्ता की सहमति और जानकारी के बिना फोटो ट्रांसफर किए जाने के आरोपों की ओर इशारा करती है। फोन के कथित दुरुपयोग की दलील पर अदालत ने कहा:

“अदालत का मानना है कि डेटा ट्रांसफर से जुड़े तर्कों की जांच किए जाने की आवश्यकता है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि याचिकाकर्ता द्वारा या उसकी सहमति से कोई डेटा ट्रांसफर नहीं किया गया था, तो याचिकाकर्ता के खिलाफ उक्त अपराध के लिए कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती।”

अदालत का निर्णय

हाईकोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ केवल बीएनएस की धारा 69 के तहत दर्ज शिकायत और एफआईआर को रद्द कर दिया।

पीठ ने निर्देश दिया कि अन्य कथित अपराधों के संबंध में जांच जारी रहेगी और जांच पूरी होने के बाद जांच एजेंसी उचित रिपोर्ट दाखिल करेगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की किसी भी टिप्पणी को आरोपी नंबर 1 के खिलाफ लगे आरोपों पर राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि वह इस कार्यवाही में पक्षकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता की अन्य सभी दलीलों को खुला रखा।

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मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: याचिकाकर्ता बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य
वाद संख्या: क्रिमिनल पिटीशन संख्या 10660/2026
पीठ: जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े
निर्णय की तिथि: 25 सितंबर, 2026

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