आय से अधिक संपत्ति मामला: कर्नाटक हाई कोर्ट 22 नवंबर को सीबीआई मंजूरी के खिलाफ डिप्टी सीएम शिवकुमार की अपील पर सुनवाई करेगा

कर्नाटक हाई कोर्ट आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा चलाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को पिछली भाजपा सरकार द्वारा दी गई मंजूरी के खिलाफ उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार द्वारा दायर अपील पर 22 नवंबर को सुनवाई करेगा।

सीबीआई ने बुधवार को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ के समक्ष उच्चतम न्यायालय के निर्देश की जानकारी दी कि ”रोक हटाने के लिए सीबीआई द्वारा दायर आवेदन और उसके समक्ष लंबित अपील (निपटारा किया जाए) यथासंभव शीघ्रता से और अधिमानतः दो सप्ताह के भीतर।”

इसके बाद अदालत ने सुनवाई की तारीख 22 नवंबर तय की।

एकल न्यायाधीश पीठ ने इससे पहले शिवकुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2019 को दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई थी। इसके बाद शिवकुमार ने इसे खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी जिसने एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी।

इस रोक को खाली कराने के लिए सीबीआई ने अर्जी दाखिल की थी. केंद्रीय एजेंसी ने एक विशेष अनुमति याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कानून के उल्लंघन को लेकर यूपी में केजरीवाल के खिलाफ कार्यवाही पर रोक बढ़ा दी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “हम इसमें हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं, खासकर तब जब याचिकाकर्ता – सीबीआई – ने पहले ही हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश पर लगी रोक को हटाने के लिए हाई कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दायर कर दिया है। ।”

हालाँकि, इसने हाई कोर्ट को आवेदन और अपील को दो सप्ताह के भीतर सुनने और निपटाने का निर्देश दिया।

आयकर विभाग ने 2017 में शिवकुमार के कार्यालयों और आवास पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया।

इसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने शिवकुमार के खिलाफ अपनी जांच शुरू की। ईडी की जांच के आधार पर, सीबीआई ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी।

READ ALSO  ऑर्किड के पौधे न भेजने पर कंज्यूमर कोर्ट का बड़ा फैसला, बुटीक को रिफंड और हर्जाना देने का आदेश

सीबीआई के इस अनुरोध के बाद राज्य सरकार ने 25 सितंबर, 2019 को मंजूरी दे दी थी। इसके आधार पर, सीबीआई ने 3 अक्टूबर, 2020 को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

शिवकुमार ने हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष मंजूरी को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति के नटराजन ने 20 अप्रैल, 2023 को याचिका खारिज कर दी।

Ad 20- WhatsApp Banner
READ ALSO  पूर्व वैवाहिक गर्भधारण पर मातृत्व अवकाश न देने पर मद्रास हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को फटकारा

Related Articles

Latest Articles