जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने श्रीनगर की प्रसिद्ध दल झील के पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए ईंधन से चलने वाली मोटरबोट, मोटरयुक्त शिकारा और जेट स्की के संचालन पर अगले आदेश तक फौरन रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस राजेश सेखरी की खंडपीठ ने 14 अक्टूबर को यह आदेश दिया। पीठ ने झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एलसीएमए), पर्यटन विभाग और पुलिस को निर्देश दिया कि वे दल झील में किसी भी तरह की ईंधन आधारित बोट या जेट स्की का संचालन पूरी तरह बंद कराना सुनिश्चित करें।
अदालत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि इस रोक के बाद भी कोई मोटरबोट चलती पाई गई या उसके चलने की सूचना मिली, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। पीठ ने संबंधित अधिकारियों को नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं, आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कार्यों में तैनात प्रशासनिक व सरकारी नौकाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
पारदर्शी नीति और नियमों की मांग
हाईकोर्ट दल झील में मोटरबोट के लाइसेंस और उनके नवीनीकरण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि नौकाओं के संचालन की अनुमति देने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, एक समान और पर्यावरण के अनुकूल होनी चाहिए। यह भी कहा गया कि मोटर से चलने वाले किसी भी वाहन या जेट स्की से झील के पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचता है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए एक सख्त नीति की जरूरत है।
सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि प्रशासन दल झील में प्रदूषण को लेकर गंभीर है और वह पर्यटन गतिविधियों के साथ-साथ झील की स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि दल झील का इस क्षेत्र की सभ्यता और संस्कृति में अहम स्थान है, इसलिए पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों और खासकर मोटरबोट के लाइसेंस तय करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
इलेक्ट्रिक और सौर ऊर्जा से चलने वाली नौकाओं पर जोर
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आधुनिक दौर में जब झीलों का संरक्षण पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है, तब प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। पीठ ने जोर देकर कहा कि प्रशासन जो भी नीति तैयार करे, उसमें पर्यटन को बढ़ावा देने, प्रदूषण रोकने और सभी नाव संचालकों के बीच निष्पक्ष संतुलन होना चाहिए।
पीठ ने यह भी कहा कि पर्यटन को बनाए रखने और दल झील के संरक्षण के बीच संतुलन साधने के लिए सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक नौकाएं एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिया कि वह विशेषज्ञों की मदद से मोटरबोट के संचालन को लेकर एक व्यापक नीति तैयार करे, जिससे प्रदूषण को कम से कम किया जा सके और पर्यटन व पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सके।

