झारखंड हाईकोर्ट ने 10 वकीलों को दिया सीनियर एडवोकेट का दर्जा; दो महिला वकील भी शामिल

झारखंड के कानूनी क्षेत्र से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के 10 वरिष्ठ और अनुभवी वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ (वरिष्ठ अधिवक्ता) का प्रतिष्ठित दर्जा दिया है। यह फैसला बुधवार, 17 जून 2026 को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई हाईकोर्ट के सभी जजों की ‘फुल कोर्ट’ बैठक में लिया गया।

वकालत की दुनिया में इस सम्मान को बेहद खास माना जाता है, जिसे आम बोलचाल में ‘सीनियर गाउन’ पहनना भी कहा जाता है। यह उपाधि उन वकीलों को दी जाती है जिन्होंने लंबे समय तक कानून की सेवा की हो और जिनकी कानूनी समझ व कोर्ट रूम में साख बेहद मजबूत हो।

इस बार की सूची बेहद खास है क्योंकि इसमें दो महिला वकीलों को भी वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया है, जो कोर्ट रूम में महिलाओं की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है:

  • इंद्राणी सेन चौधरी: लगभग पांच दशकों (50 साल) के अदालती अनुभव के साथ इंद्राणी सेन चौधरी इस नई सूची में सबसे वरिष्ठ वकील हैं।
  • दर्शना पोद्दार मिश्रा: दो दशकों से अधिक समय से सक्रिय वकालत कर रहीं दर्शना पोद्दार मिश्रा को सरकारी और निजी दोनों पक्षों की ओर से मजबूत पैरवी करने के लिए जाना जाता है।
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इसके अलावा, इस सूची में झारखंड हाईकोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले डिप्टी सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव का नाम भी शामिल है, जिन्होंने कई बड़े और महत्वपूर्ण मुकदमों में सरकार की पैरवी की है।

नए सीनियर एडवोकेट्स की पूरी सूची:

  1. जितेंद्र एस. सिंह
  2. दर्शना पोद्दार मिश्रा
  3. डॉ. हसनैन वारिस
  4. प्रशांत पल्लव
  5. अमर कुमार सिन्हा
  6. इंद्राणी सेन चौधरी
  7. अमित कुमार दास
  8. राजिव सिन्हा
  9. राजेंद्र कृष्ण
  10. कल्याण रॉय

चयन की आधुनिक और पारदर्शी प्रक्रिया

इन सभी वकीलों का चयन हाईकोर्ट के नए 2025 के नियमों के तहत किया गया है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।

इस प्रक्रिया में वकीलों को सीधे चुनने के बजाय एक पॉइंट सिस्टम (अंक प्रणाली) के तहत परखा जाता है। इसमें मुख्य रूप से इन बातों को देखा जाता है:

  • वकील को वकालत का कितना लंबा अनुभव है।
  • कोर्ट में उनके तर्क और मुकदमों की गुणवत्ता कैसी रही है।
  • उनके कानूनी शोध, लेख और शैक्षणिक कार्य।
  • समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों को दी गई मुफ्त कानूनी मदद (प्रो-बोनो कार्य)।
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यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और स्थानीय वकीलों व बार एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सभी नए वरिष्ठ वकीलों को बधाई दी है।

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