इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में एक नया मोड़ आया है। मेघालय की एक निचली अदालत द्वारा उनकी पत्नी सोनम को जमानत दिए जाने के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने अब मेघालय हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया है। परिवार ने इस पूरी जांच में ‘साजिश’ की आशंका जताई है और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
यह दुखद घटना पिछले साल 23 मई की है, जब राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे और वहां से लापता हो गए। 2 जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा इलाके में एक झरने के पास गहरी खाई से उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था।
मेघालय पुलिस ने करीब नौ महीने की लंबी जांच के बाद सितंबर 2023 में 790 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस आरोप पत्र में सोनम और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह सहित आठ लोगों को हत्या की साजिश रचने का मुख्य आरोपी बनाया गया था। सोनम को 9 जून, 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद वह पिछले 10 महीनों से शिलांग जिला जेल में न्यायिक हिरासत में थी।
गईं। उन्होंने कहा, “मेघालय पुलिस ने पिछले नौ महीनों तक मामले की गहन जांच की, लेकिन हमारी समझ से बाहर है कि पिछले एक-दो महीनों में खेल अचानक कैसे बदल गया।” उन्होंने सरकार से न्याय की गुहार लगाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने बताया कि वे निचली अदालत के इस फैसले को मेघालय हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने उन्हें अभी तक चार्जशीट की कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई है, जिससे वे मामले की बारीकियों को समझ सकें।
अदालत में सुनवाई के दौरान सोनम के वकील ने तर्क दिया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी के समय अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया था। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह था कि गिरफ्तारी के वक्त सोनम को उसकी गिरफ्तारी के ठोस कारणों के बारे में सही तरीके से सूचित नहीं किया गया था, जिसे वकील ने कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।
रघुवंशी परिवार इन तर्कों को मानने को तैयार नहीं है और उन्हें संदेह है कि जांच में कहीं न कहीं हेरफेर किया गया है। उनका कहना है कि जिस महिला को हत्या की “मास्टरमाइंड” बताया गया है, उसे जमानत मिलना न्याय की प्रक्रिया के लिए एक बड़ा खतरा है।

