शादी के बीच में काम रोकने वाली इवेंट कंपनी पर कार्रवाई: उपभोक्ता आयोग ने दिया ₹5.60 लाख लौटाने और ₹1.10 लाख हर्जाने का आदेश

हैदराबाद उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शादी के कार्यक्रमों के बीच में काम रोकने और अतिरिक्त पैसों की मांग करने पर एक वेडिंग इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा का दोषी ठहराते हुए ग्राहक को 5.60 लाख रुपये की राशि लौटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, ऐन वक्त पर हुई परेशानी और मानसिक तनाव के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में 45 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया है।

यह फैसला आयोग की अध्यक्ष बी. उमा वेंकट सुब्बा लक्ष्मी तथा सदस्य सी. लक्ष्मी प्रसन्ना और वी. जनार्दन रेड्डी की पीठ ने 22 जुलाई को एक 56 वर्षीय व्यक्ति की शिकायत पर सुनाया। शिकायतकर्ता ने अक्टूबर 2024 में अपनी बेटी की शादी से जुड़े विभिन्न आयोजनों का जिम्मा 15 साल के अनुभव का दावा करने वाली एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को सौंपा था। इसके तहत सगाई, संगीत, हल्दी-मेहंदी, पेल्लीकुथुरु रस्म और घर की सजावट के लिए कुल 13 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए गए थे।

अतिरिक्त रुपयों की मांग और सेवा में रुकावट

20 अक्टूबर 2024 को हुई सगाई और 27 अक्टूबर को आयोजित संगीत कार्यक्रम के इंतजामों से असंतुष्ट होकर परिवार ने कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। शुरुआत में 13 लाख रुपये में से 6.60 लाख रुपये लौटाकर बाकी कार्यक्रम रद्द करने पर सहमति बनी, लेकिन बाद में कंपनी ने पैसे लौटाने में असमर्थता जताई और बाकी रस्में पूरी करने का आश्वासन दिया। हालांकि, इसके बाद कंपनी ने शिकायतकर्ता की पत्नी के व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर सेवाएं देने से साफ इनकार कर दिया। कंपनी ने बाकी कार्यक्रमों के संचालन के लिए 25 लाख रुपये और अतिरिक्त एडवांस राशि की मांग रख दी, जिसके कारण परिवार को अचानक दूसरा इवेंट प्लानर हायर करना पड़ा।

कंपनी की दलील और आयोग का रुख

मामले की सुनवाई के दौरान इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के वकील के. विक्रम ने दलील दी कि उन्होंने पूर्व में शिकायतकर्ता की शादी की 25वीं वर्षगांठ का आयोजन भी सफलतापूर्वक किया था। उन्होंने दावा किया कि सगाई और संगीत के कार्यक्रम ठीक से आयोजित किए गए थे और शिकायतकर्ता का असंतोष केवल कंपनी का बकाया भुगतान न करने का एक बहाना था।

लिखित समझौते के बिना शर्त थोपना गैरकानूनी

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आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए पाया कि कंपनी ऐसा कोई भी हस्ताक्षरित दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि ग्राहक ने उन भुगतान शर्तों को स्वीकार किया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि दो कार्यक्रम पूरे होने के बाद शर्तों में बदलाव करना, आगे के काम के लिए अतिरिक्त एडवांस मांगना और रद्दीकरण शुल्क का दबाव बनाना पूरी तरह से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां बीच में सेवाएं नहीं रोक सकतीं और उन्हें नियम व शर्तें पहले ही पारदर्शी और सहमति के आधार पर तय करनी चाहिए।

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