सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जनजातियों की बेटियों के विरासत अधिकार उनके विशिष्ट पारंपरिक कानूनों द्वारा ही शासित होंगे, न कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस निर्देश को रद्द कर
