सुप्रीम कोर्ट का आदेश कंपनी अनिश्चितकालीन के लिए ब्लैकलिस्ट नही की जा सकती है

Supreme Court ने एक फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी अनिश्चितकाल के लिए ब्लैकलिस्ट नही हो सकती है।  ब्लैकलिस्ट करने का आदेश  बिज़नेस पर्सन के खिलाफ न सिर्फ मौजूदा समय मे क्रियाशील रहता बल्कि उसे दागी भी बना देता है। यह आरोप बहुत दूर तक जाता है और संस्थान के लिए मौत का भी कारण बनता है जिसे सिविल डेथ नाम से जाना जाता है।

न्यायाधीश आर एफ नरीमन की संयुक्त पीठ ने वर्ष 2009 में ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी फार्मा कंपनी वेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का प्रतिबंध कैंसिल कर दिया है। 

कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश यूपी एनिमल हज्बेन्द्री विभाग ने दिया था। 

आदेश में जिक्र था कि कंपनी ने कई तरह की एनिमल मेडिसिन मानकों के विपरीत आपूर्ति की हैं। 

इस बैन में जिक्र था कि कंपनी द्वारा आपूर्ति की गई ऑक्सी टेट्रासाइक्लिन इंजेक्शन की दवाएं राज्य विश्लेषक ने निम्न स्तर पर पाई थी। 

उसके बाद कंपनी को गवर्मेंट टेंडर लेने से रोक दिया गया था।

कंपनी ने इस आदेश को 2019 में बॉम्बे हाइकोर्ट में चैलेंज किया था लेकिन देरी के चलते इस अपील को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 

इसके बाद अपील को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया। संयुक्त पीठ ने आदेश में कहा कि राज्य सरकार के आदेश में ऐसा नही लिखा है कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का इरादा है या उसको ब्लैकलिस्ट करने पर विचार हो रहा है। 

यदि पारदर्शी होता तो कंपनी अच्छे तरीके से जवाब देती।

कोर्ट का कथन था कि पहले के आदेश में साफ कहा है कि तीन साल से ज्यादा और पांच साल तक का बांड अनुचित होता है। 

Case Details:-

Title: VETINDIA Pharmaceuticals Ltd. vs State of UP & Another

Case No.: CIVIL APPEAL NO.3647 OF  2020 

Date of Order:06.11.2020

Coram: Hon’ble Justice RF Nariman, Hon’ble Justice Navin Sinha and Hon’ble Justice Krishna Murari

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