क्या बीमा कंपनी ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेन्स न होने पर भी मुआवजा देने के लिए बाघ्य है? सुप्रीम कोर्ट

23 सितंबर, 2020 को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच जिसमें, जस्टिस संजय किशन कौशल, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी थे, वर्कमैन कम्पेनसेशन के मामले में ड्राइवर के पास उपलब्ध लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के उपरान्त इंश्योरेंस कंपनी की जिम्मेदारी के संबध में अपना निर्णय पारित किया।

बेली राम बनाम राजिंदर कुमार एवं अन्य के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार है –

दिनांक 20.05.1999 को विपक्षी संख्या 2 (ट्रक ड्राइवर) के साथ ट्रक चालाते समय एक दुर्घटना हुई, जिससे उसे 20 प्रतिशत की विकलांगता हो गयी।

प्रथम प्रतिवादी (ट्रक ड्राइवर) ने 17.2.1999 को कमिश्नर, सदर, बिलासपुर के समक्ष कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत मुकदमा चलाया और 50000 रुपये के मुआवजे की मांगा अपीलार्थी (ट्रक मालिक) से और दूसरी प्रतिवादी (बीमाकर्ता कंपनी) से की।

आयुक्त ने एक आदेश दिया कि बीमा कंपनी प्रथम प्रतिवादी को 94,464 रूपये चोटों के लिए और 67,313 रूपये चिकित्सा खर्च के लिए देगी। साथ ही साथ आयुक्त द्वारा अपीलकर्ता (ट्रक के मालिक) पर 9 प्रतिशत ब्याज, आवेदन के दाखिल होने की तिथि से, भुगतान करने के लिए निर्देशित किया गया था।

सभी पक्षों ने विभिन्न आधारों पर उच्च न्यायालय में अपील दायर की। एक आधार जो बीमाकर्ता द्वारा लिया गया था वह यह था कि प्रतिवादी नंबर 1 का ड्राइविंग लाइसेंस दुर्घटना की तारीख से तीन साल पहले समाप्त हो गया था। माननीय उच्च न्यायालय ने उक्त पर विचार किया और बीमाकर्ता कंपनी को उसकी देयता की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। न्यायालय ने मालिक (अपीलकर्ता) को मुआवजे की राशि का 50 प्रतिशत जुर्माना और ब्याज और 1,99,287 रुपये की कुल राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।

पक्षकारों द्वारा एक रिव्यू याचिका दायर की गई थी, जिसे 08.07.2009 को खारिज कर दिया गया था

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुद्दा

माननीय सर्वोच न्यायालय के समक्ष कानून का प्रश्न यह था कि क्या एक बीमाधारक (वाहन का मालिक) अपनी देयता से मुक्त हो सकता है, यदि उसके अधीन नियोजित व्यक्ति द्वारा वैध ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई हो।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कार्यवाही


याचिकाकर्ता ने निर्मला कोठारी बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट पर निर्भरता रखी, जहां यह माना गया है कि यदि बीमाधारक ने ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता की जांच में उचित देखभाल की है, तो उसे देयता से मुक्त कर देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मामले में निर्णय देने के लिए भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों के तीन निर्णयों का उल्लेख किया

टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम आकांशा एंड ऑर्म्स में दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय, जहां यह निर्णय दिया गया था कि यदि दुर्घटना की तारीख में कोई वैध लाइसेंस नहीं था, तो बीमा कंपनी को अपने दायित्व से मुक्त कर देना चाहिए और बीमाधारक / मालिक को यह साबित करना चाहिए कि बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस सह बनाम मनोज कुमार के मामले में कहा कि एक्सपायर लाइसेंस के मामले में चूंकि मालिक को यह पता होना चाहिए था कि ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका था और इस तरह से यह माना जाता है कि क्या मालिक का कर्तव्य यह सुनिश्चित करना था कि चालक को समय के भीतर लाइसेंस नवीनीकृत हो जाना चाहिए था। वैध ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव में, वाहन को पॉलिसी की शर्त के उल्लंघन में चलाया जा रहा था।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम हेम राज एवं अन्य में मानना था कि एक्सपायर लाइसेंस के मामले में ड्राइवर को 30 दिनों के भीतर रिन्यू करवाना चाहिए था। यदि ऐसा नहीं किया गया है, तो ड्राइवर दावा नहीं कर सकता कि लाइसेंस को पूर्वव्यापी रूप से नवीनीकृत किया जाना चाहिए। इस मामले में यह भी आयोजित किया गया था कि मालिक को यह देखना होगा कि लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला


अंततः सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि ट्रक के मालिक ने चालक के लाइसेंस की जाँच में उचित ध्यान नहीं दिया। ट्रक के मालिक को देखना चाहिए था कि क्या उसके कर्मचारी के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। इस मामले में, ड्राइवर का लाइसेंस तीन साल पूर्व समाप्त हो चुका था, अतः बीमा कम्पनी पर कोई जिम्मेदान नहीं डाली जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, अपीलकर्ता को इस प्रकार, समाप्त हो चुके लाइसेंस के साथ ड्राइवर को गाड़ी चलाने की अनुमति देने की जिम्मेदारी और परिणामी देयता भुगतनी पड़ेगी।

अपील को सरसरी तौर पर खारिज कर दिया गया।

Case Details-

Case Title: Beli Ram vs Rajinder Kumar & Ors

Case No.: CIVIL APPEAL NOS. 7220-7221 OF 2011

Date of Order: 23.09.2020

Quorum: Justice Sanjay Kishan Kaushal, Justice Aniruddha Bose and Justice Krishna Murari

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