ड्रग्स का नमूना लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं किये जाने पर जमानत अर्जी मंजूर :ALL HC

कल Allahabad High Court के माननीय न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने ड्रग्स के नमूने के लिए स्थायी आदेश के खंड 2.4 का अनुपालन न करने के कारण एक अभियुक्त को जमानत पर रिहा कर दिया

फूलचंद अली बनाम भारत संघ (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, लखनऊ) मामले के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार है।

याची के खिलाफ मामला यह है कि 25.08.2019 को, सर्किल अधिकारी ने इंटेलिजेंस अधिकारी को सूचित किया कि शालम अली और फूल चंद अली 150 किलो गांजा असम से मऊ ले जा रहे थे।

NCB द्वारा याची को मऊ से 25.08.2019 को गिरफ्तार किया गया। NCB ने कार में एक गुप्त स्थान से गांजा भी बरामद किया, जिसकी मात्रा 149 किलोग्राम थी।

प्रत्येक पैकेट से थोड़ी मात्रा में गांजा निकाला गया, प्रत्येक 24 ग्राम के दो प्रतिनिधि पैकेट लिये गए और उन्हें सील कर दिया गया।

याची द्वारा एक जमानत याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की।

Allahabad High Court के समक्ष कार्यवाही

याची के वकील ने हाईकोर्ट के समक्ष निम्नलिखित बिंदु उठाए-

यह प्रस्तुत किया गया था कि NCB ने नमूने के लिए सामान्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जैसा कि 1989 के स्थायी आदेश संख्या 01 दिनांक 13.06.1989 में उल्लेख किया गया है।

वकील ने तर्क दिया कि NCB को फील्ड परीक्षण किट की सहायता से कथित रूप से बरामद किए गए प्रत्येक पैकेट से एक नमूना निकालना था। उत्तरदाताओं ने सभी पैकेटों की सामग्री को मिलाया था, फिर एक नमूना तैयार किया। स्थायी प्रक्रिया में इस प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया था। चूंकि 19 पैकेट बरामद किए गए थे, प्रत्येक पैकेट से नमूने लिए जाने चाहिए थे, इसलिए प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने पर, NCB ने याची के मामले में गंभीर पूर्वाग्रह का प्रदर्शन किया है।

याची के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के अमन फिदेल क्रिस बनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निर्णय पर भरोसा किया, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि प्रत्येक पैकेट से एक नमूना नहीं लिया जाता है, तो इसे स्थायी आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।

NCB का तर्क

NCB के वकील ने याची के तर्को का खंडन किया और कहा कि जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि अमन फिदेल क्रिस बनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का मामला आपराधिक अपील का था और जमानत पर विचार किए जाने पर लागू नहीं होगा।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि अमन फिदेल क्रिस बनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में केवल चार पैकेट जब्त किए गए थे और पांच ग्राम के नमूने लिए गए थे, जबकि वर्तमान मामले में सभी 19 पैकेटों के नमूने मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणित किए गए थे।

यह भी कहा गया कि स्थायी आदेश का खंड 2.4 सलाहकार रूपी है न कि अनिवार्य। सरकारी वकील ने कहा कि स्थायी आदेश की सभी आवश्यकताओं का अनुपालन इस मामले में किया गया था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का विशलेषण

माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि स्थायी आदेश का खंड 2.4 का खंडन करने वाला याचाी का तर्क वास्तव में सही है। कोर्ट ने नूर आगा बनाम पंजाब राज्य के निर्णय का उल्लेख किया जहां यह कहा गया था कि अधिकारियों को स्थायी आदेश में निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन करना चाहिए क्यूँकि वह अनिवार्य है।

प्रतिवादी के दूसरे तर्क पर विचार करते हुए कि दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय अमन फिदेल क्रिस बनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के लिए कोर्ट ने कहा किय यह निर्णय वर्तमान मामले में लागू नहीं होता है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि भले ही एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 में प्रावधान है कि जब तक कि असाधारण परिस्थितियों न हो कोर्ट को जमानत से इनकार करना चाहिए, परन्तु वर्तमान मामले में स्थायी आदेश के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया था, जिसके लिये याची को परीक्षण के बाद बरी किया जा सकता है। लिहाजा, कोर्ट को जमानत देने पर विचार करना चाहिए।

कोर्ट द्वारा यूनियन ऑफ इंडिया बनाम शिव शंकर केशरी के निर्णय का भी संदर्भ दिया गया था, जहां सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 37 के संदर्भ में जमानत के लिए आवेदन पर विचार करते समय न्यायालय को दोषी होने या न होना का पता लगाने कि जरूरत नहीं है। न्यायालय को विचार करना चाहिए कि क्या व्यक्ति को जमानत पर रिहा करने के लिए उचित आधार है और इस पर विचार नहीं करना चाहिए कि वह दोषमुक्त होगा या नहीं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय

तर्कों को सुन्ने के बाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने माना कि याची को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

Case Details:-

Title: Phool Chand Ali vs Union Of India (Narcotics Control Bureau, Lucknow) 

Case no. Criminal Misc. Bail Application No. – 19743 Of 2020 

Date of Order; 12.10.2020

Coram: Hon’ble Justice Gautam Chaudhary

Counsel for Applicant:- Rajesh Pratap Singh, Om Prakash Singh (Senior Adv.) Counsel for Opposite Party:- Ashish Pandey 

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