‘जेल नहीं, जमानत नियम है’: 15,000 नशीली गोलियों के साथ पकड़े गए रैपिडो ड्राइवर को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उस रैपिडो कैब ड्राइवर को जमानत दे दी है, जिसकी गाड़ी से भारी मात्रा में नशीली गोलियां बरामद हुई थीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए स्पष्ट किया कि पहली नजर में नशीला पदार्थ (Tramadol) उन यात्रियों का प्रतीत होता है जिन्होंने ऐप के जरिए कैब बुक की थी, न कि ड्राइवर का।

न्यायमूर्ति सुभाष मेहला ने 4 मई को दिए अपने आदेश में भारतीय आपराधिक न्यायशास्त्र के एक बुनियादी सिद्धांत को दोहराते हुए कहा, “जमानत नियम है और जेल अपवाद।” अदालत ने माना कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक ड्राइवर राम कुमार पांडे को केवल सजा देने के उद्देश्य से जेल में नहीं रखा जाना चाहिए।

यह मामला 19 नवंबर, 2025 का है, जब पुलिस ने रैपिडो प्लेटफॉर्म के तहत चल रही एक कैब को चेकिंग के लिए रोका था। तलाशी के दौरान, पिछली सीट पर रखे दो बैगों से ट्रामाडोल (Tramadol) की कुल 15,000 गोलियां बरामद हुईं। ट्रामाडोल एक ओपियोइड दवा है, जिसे कानून के तहत ‘व्यावसायिक मात्रा’ (Commercial Quantity) की श्रेणी में रखा गया है।

इस मामले में पुलिस ने ड्राइवर पांडे के साथ-साथ कार में सवार दो यात्रियों, अमन और मोहम्मद अरशद को भी गिरफ्तार किया था। पांडे पिछले पांच महीनों से अधिक समय से हिरासत में थे।

अदालत के फैसले में सबसे अहम मोड़ कैब बुकिंग का डिजिटल रिकॉर्ड रहा। जांच और राज्य सरकार की रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई कि ड्राइवर पांडे का आरोपियों से कैब बुक करने से पहले कोई संपर्क नहीं था।

READ ALSO  कोर्ट ने 15 साल के लड़के से रेप के आरोप में 19 साल की लड़की को दस साल की सजा सुनाई

न्यायमूर्ति मेहला ने आदेश में कहा, “इस स्तर पर… प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिबंधित सामग्री कैब के ग्राहकों की थी।” हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि मालिकाना हक का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान होगा, लेकिन वर्तमान सबूत बताते हैं कि पांडे केवल एक सर्विस प्रोवाइडर के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे थे।

पांडे की ओर से वकील अतुल अग्रवाल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशीला पदार्थ पिछली सीट से मिला था जहाँ यात्री बैठे थे, और पांडे के पास से व्यक्तिगत रूप से कुछ भी बरामद नहीं हुआ।

READ ALSO  केरल में डॉक्टर की हत्या के आरोपी शख्स को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

कोर्ट ने जमानत देते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर गौर किया:

  • साफ रिकॉर्ड: पांडे का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ रहा है।
  • लंबी हिरासत: याचिकाकर्ता नवंबर 2025 से यानी 5 महीने और 11 दिन जेल में बिता चुका है।
  • ट्रायल में देरी: कोर्ट ने माना कि मुकदमे की कार्यवाही पूरी होने में अभी काफी समय लग सकता है।

अभियोजन पक्ष (Deputy Advocate General) ने नशीली दवाओं की भारी मात्रा का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने ऐप आधारित बुकिंग की परिस्थितियों को देखते हुए पांडे की याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि ड्राइवर को आगे हिरासत में रखने से कोई “सार्थक उद्देश्य” सिद्ध नहीं होगा।

READ ALSO  14वीं सदी की मस्जिद को कैसे रजिस्टर करेंगे?: सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, ‘यूज़र वक्फ’ की समाप्ति पर जताई गंभीर चिंता 
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles