पीएमएलए मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने सुपरटेक चेयरमैन की डिफ़ॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुपरटेक समूह के अध्यक्ष आर.के अरोड़ा की डिफ़ॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।

अरोड़ा ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें डिफ़ॉल्ट जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया था कि अभियोजन शिकायत दर्ज करने के समय जांच अधूरी थी, क्योंकि आरोप पत्र में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) रिपोर्ट का अभाव था और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकायत दर्ज करने के बाद मामले के संबंध में एक अन्य व्यक्ति को तलब किया था।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने इन दलीलों को खारिज कर दिया, यह देखते हुए कि ईडी ने एफएसएल से विशेषज्ञ राय के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे, और एफएसएल रिपोर्ट की तैयारी एजेंसी के नियंत्रण से परे थी।

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंदर कुमार जंगला ने 16 फरवरी को स्वास्थ्य आधार पर अरोड़ा की अंतरिम जमानत 30 दिनों के लिए बढ़ा दी थी।

24 जनवरी को अदालत ने अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी और 31 जनवरी को न्यायमूर्ति ओहरी ने जमानत से इनकार को चुनौती देने वाली अरोड़ा की याचिका पर ईडी से जवाब मांगा।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2018 के एशियन रिसर्फेसिंग निर्णय को पलटा- अब छः महीने पूरे होने पर अपने आप नहीं समाप्त होगा स्टे

ट्रायल कोर्ट ने 26 सितंबर, 2003 को अरोड़ा के खिलाफ आरोप पत्र पर संज्ञान लिया और उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ईडी ने आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी कर ली है।

Also Read

READ ALSO  आयकर नियमों के तहत दो लाख रुपयों के नकद प्राप्ति पर लग सकती है पेनाल्टी

इस मामले में ईडी द्वारा उनकी 40 करोड़ रुपये की संपत्ति दोबारा कुर्क करने के बाद पिछले साल 27 जून को गिरफ्तार किए गए अरोड़ा ने कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी के आधार के बारे में बताए बिना गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, अदालत ने उनके दावे को खारिज कर दिया, यह देखते हुए कि जांच एजेंसी ने कानून के प्रासंगिक प्रावधानों का अनुपालन किया।

जांच एजेंसी ने 24 अगस्त को इस मामले में अरोड़ा और आठ अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। अरोड़ा पर कम से कम 670 घर खरीदारों से 164 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।

READ ALSO  ई-रिक्शा हादसे में बच्ची की मौत के बाद दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, सरकार और ट्रैफिक पुलिस से मांगा जवाब
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles