इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के भीतर स्थित ‘वजूखाना’ क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 मई, 2024 की तिथि निर्धारित की है।
यह मामला राखी सिंह द्वारा दायर एक सिविल पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा है। राखी सिंह श्रृंगार गौरी पूजा मामले में मुख्य वादियों में से एक हैं। उन्होंने वाराणसी जिला जज के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वजूखाना क्षेत्र का तकनीकी परीक्षण करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था।
याचिका में विशेष रूप से पूरे ‘वजूखाना’ क्षेत्र के एएसआई सर्वे की मांग की गई है, जिसमें जलाशय के केंद्र में स्थित ढांचे को छोड़कर बाकी हिस्से की जांच करने को कहा गया है। गौरतलब है कि इस ढांचे को लेकर गहरा कानूनी और धार्मिक विवाद है; हिंदू पक्ष इसे ‘शिवलिंग’ बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह एक ‘फव्वारा’ है।
पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से वाराणसी जिला अदालत के 21 अक्टूबर, 2023 के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। जिला जज ने अपने फैसले में वजूखाना क्षेत्र के सर्वेक्षण का निर्देश देने से मना कर दिया था, जिसके बाद वादी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
राखी सिंह और अन्य वादियों ने मूल रूप से इस स्थल पर पूजा के अधिकार की मांग करते हुए श्रृंगार गौरी वाद दायर किया था। हालांकि एएसआई पहले ही मस्जिद परिसर के अन्य हिस्सों का विस्तृत सर्वेक्षण कर चुका है, लेकिन कानूनी संरक्षण और ढांचे की प्रकृति पर जारी विवाद के कारण ‘वजूखाना’ को उन कार्यवाहियों से बाहर रखा गया था।
14 मई को होने वाली अगली सुनवाई में हाईकोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या केंद्र में स्थित विवादित ढांचे को प्रभावित किए बिना आसपास के वजूखाना क्षेत्र का गैर-आक्रामक (non-invasive) सर्वेक्षण किया जा सकता है।

