ड्रग इंस्पेक्टर की योग्यता तय करने का अधिकार राज्य के पास नहीं; 2015 के नियमों का नियम 8 केंद्रीय कानून के विरुद्ध: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ड्रग इंस्पेक्टर के पद के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित अतिरिक्त योग्यताओं को असंवैधानिक करार दिया है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने ‘यू.पी. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग राजपत्रित अधिकारी (औषधि) सेवा (तीसरा संशोधन) नियमावली, 2015’ के नियम 8(ii)(a) से (c) को ‘अल्ट्रा वायर्स’ (अधिकार क्षेत्र से बाहर) घोषित किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) के पद के लिए ऐसी योग्यताएं निर्धारित करने की क्षमता नहीं है जो केंद्र सरकार द्वारा ‘औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940’ के तहत तय नियमों के विपरीत या उससे अधिक हों।

मामले की पृष्ठभूमि

अदालत दो संबंधित मामलों की सुनवाई कर रही थी: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा दायर विशेष अपील संख्या 163/2021 और रिट ए संख्या 8721/2022। विवाद 2016 और 2018 में विज्ञापित ड्रग इंस्पेक्टर के पदों की चयन प्रक्रिया से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं ने 2015 के राज्य नियमों के नियम 8 को चुनौती दी थी, जिसमें अनुभव को “अनिवार्य योग्यता” के रूप में शामिल किया गया था। राज्य के इन नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों के पास फार्मेसी या मेडिसिन में डिग्री के साथ-साथ ‘शेड्यूल सी’ में निर्दिष्ट पदार्थों के निर्माण या परीक्षण में 18 महीने का अनुभव होना अनिवार्य था।

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट श्री अनुराग शुक्ला ने तर्क दिया कि ड्रग इंस्पेक्टर का पद एक केंद्रीय अधिनियम (औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940) द्वारा शासित है, जो संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है। उन्होंने दलील दी कि अधिनियम की धारा 21(1) और 33(2)(b) के तहत योग्यता निर्धारित करने का विशेष अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। केंद्र सरकार ने 1945 के नियमों के नियम 49 के तहत पहले ही शैक्षणिक डिग्री को अनिवार्य योग्यता के रूप में तय कर दिया है। अनुभव का उल्लेख केवल विशिष्ट कार्यों (शेड्यूल सी पदार्थों के निरीक्षण) के लिए है, न कि सीधी भर्ती के लिए।

दूसरी ओर, राज्य सरकार और UPPSC ने तर्क दिया कि राज्य सूची की प्रविष्टि 41 (लोक सेवा) के तहत राज्य को अपने मामलों से जुड़े पदों की सेवा शर्तों को विनियमित करने का अधिकार है। उन्होंने एस. सत्यपाल रेड्डी बनाम आंध्र प्रदेश सरकार (1994) के मामले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य केंद्र द्वारा निर्धारित “न्यूनतम” योग्यता से “उच्च” योग्यता तय कर सकता है।

हाईकोर्ट का विश्लेषण

हाईकोर्ट ने गौर किया कि अनुच्छेद 309 के तहत नियम बनाने की शक्ति किसी भी विधायी अधिनियम के प्रावधानों के अधीन होती है। अदालत ने पाया कि 1940 का केंद्रीय अधिनियम इस विषय पर प्राथमिक कानून है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले हरियाणा राज्य बनाम कृष्ण कुमार (2025) का संदर्भ देते हुए खंडपीठ ने कहा:

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“D&C अधिनियम एक केंद्रीय कानून होने के नाते केंद्र सरकार को निरीक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यता निर्धारित करने की शक्ति प्रदान करता है… यह इस विषय पर प्राथमिक कानून है। अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए 2015 के राज्य नियम, ड्रग नियमों (केंद्रीय नियमों) को ओवरराइड नहीं कर सकते।”

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय नियमों के नियम 49 में अनुभव की शर्त केवल ‘शेड्यूल सी’ इकाइयों के निरीक्षण के लिए अधिकृत करने के लिए है, न कि पद पर नियुक्ति के लिए। राज्य ने इस अनुभव को भर्ती की अनिवार्य योग्यता बनाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।

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अदालत का फैसला

हाईकोर्ट ने 2015 के नियमों के नियम 8(ii)(a) से (c) को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि, अदालत ने 2016 और 2018 के विज्ञापनों या उनके आधार पर की गई नियुक्तियों को रद्द करने से इनकार कर दिया। बेंच ने इस बात पर ध्यान दिया कि 27 में से 23 पद भरे जा चुके हैं और चयनित उम्मीदवार पिछले पांच वर्षों से काम कर रहे हैं। अदालत ने कहा:

“…चूंकि वे योग्य हैं, इसलिए उन्हें पांच साल बाद सेवा से बाहर करना अनुचित और अन्यायपूर्ण होगा, क्योंकि उनका सारा अनुभव व्यर्थ चला जाएगा।”

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जो याचिकाकर्ता इस नियम के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर रह गए थे, उन्हें राहत देते हुए हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि उन्हें 22 दिसंबर 2025 को जारी नए विज्ञापन की चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

अंत में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया:

“यह स्पष्ट किया जाता है कि ड्रग इंस्पेक्टर के पद के लिए लंबित और भविष्य के सभी चयनों में वही योग्यताएं मान्य होंगी जो केंद्र सरकार द्वारा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 33(2)(b), 21 और 3(i) के तहत बनाए गए नियमों में निर्धारित हैं।”

केस विवरण :

केस शीर्षक: यू.पी. पब्लिक सर्विस कमीशन प्रयागराज बनाम आशीष त्यागी और अन्य

केस संख्या: स्पेशल अपील संख्या 163 ऑफ 2021

पीठ: जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला

दिनांक: 3 अप्रैल, 2026

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