पत्नी की बीमारी का हवाला देकर CRPF ASI ने मांगी तबादले से राहत, गौहाटी हाईकोर्ट का रोक लगाने से इनकार

गौहाटी हाईकोर्ट ने CRPF के एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के गुवाहाटी से छत्तीसगढ़ किए गए तबादले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अधिकारी ने दलील दी थी कि उसकी पत्नी एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित है और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उसी पर है।

जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि तबादला नौकरी का सामान्य हिस्सा है और ऐसे मामलों में कोर्ट का दखल बहुत सीमित रहता है। कोर्ट ने कहा कि जब तक तबादला आदेश में किसी वैधानिक नियम का उल्लंघन या साफ तौर पर दुर्भावना नजर न आए, तब तक उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

हालांकि, हाईकोर्ट ने अधिकारी को नई पोस्टिंग पर जाने के लिए 15 दिन का समय दिया। साथ ही कहा कि उसे अपनी पत्नी के इलाज की व्यवस्था करने के लिए उचित अवसर दिया जाए।

पत्नी की बीमारी और पारिवारिक परेशानी का दिया हवाला

याचिकाकर्ता CRPF में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर/GD है और उसकी तैनाती गुवाहाटी के अमेरिगोग में थी। CRPF ने 24 दिसंबर 2025 के आदेश से उसका तबादला छत्तीसगढ़ की 231 बटालियन में कर दिया था।

READ ALSO  हाईकोर्ट ने लोक अभियोजक और जांच अधिकारी के वेतन को रोका कहा- उचित तत्परता से कर्तव्यों का पालन नहीं हुआ

अधिकारी की ओर से अधिवक्ता डी गोगोई और टी वापांगला ने हाईकोर्ट में कहा कि उसकी पत्नी एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित है और उसकी देखभाल करने वाला वह अकेला व्यक्ति है। इसके अलावा परिवार से जुड़ी दूसरी परेशानियों का भी हवाला दिया गया।

इससे पहले उसने अपनी बेटी की NEET परीक्षा की तैयारी को भी तबादला रोकने का एक कारण बताया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि परीक्षा अब समाप्त हो चुकी है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि उसकी परिस्थितियों को देखते हुए पहले कुछ समय दिया गया था। असम में चुनाव के कारण भी उसका तबादला कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। बाद में हाईकोर्ट ने 18 मई को अंतरिम आदेश पारित किया था।

तबादले में कोर्ट का दखल सीमित

READ ALSO  यूपी जल निगम भर्ती विवाद: हाईकोर्ट ने रद्द की जूनियर इंजीनियरों की बर्खास्तगी, सेवा निरंतरता के साथ बहाली का दिया आदेश

केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता आर देवी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि तबादला आदेश में कोर्ट तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब उसमें दुर्भावना हो या किसी वैधानिक नियम का उल्लंघन किया गया हो।

उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो दुर्भावना का कोई आरोप लगाया गया है और न ही किसी नियम के उल्लंघन की बात सामने आई है। अधिकारी की परेशानियों पर पहले ही विचार किया जा चुका है और उसे पर्याप्त समय भी दिया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि तबादला आदेश 24 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था और उसके बाद याचिकाकर्ता को पर्याप्त समय मिल चुका है। ऐसे में उसकी ओर से बताए गए कारण तबादला आदेश में हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

कोर्ट ने तबादले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए अधिकारी को 15 दिन का समय दिया और कहा कि नई पोस्टिंग वाली जगह पर पत्नी के इलाज के लिए उसे उचित अवसर उपलब्ध कराया जाए।

READ ALSO  दिल्ली हाई कोर्ट ने हरियाणा न्यायिक पेपर लीक मामले में रोजाना सुनवाई का आदेश दिया

जून में भी CRPF कॉन्स्टेबल की याचिका हुई थी खारिज

इससे पहले जून में गौहाटी हाईकोर्ट ने एक CRPF कॉन्स्टेबल के तबादले पर भी रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उस मामले में कॉन्स्टेबल ने अपनी पत्नी को प्रसव के बाद हो रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और ओडिशा जाने में कठिनाई का हवाला दिया था।

जस्टिस शमीमा जहां ने उस मामले में कहा था कि कॉन्स्टेबल सिलचर स्थित CRPF के काउंटर इंसर्जेंसी एंड एंटी-टेररिज्म स्कूल में चार साल की सेवा पूरी कर चुका है।

नई पोस्टिंग वाली जगह पर इलाज की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी मिलने के बाद कोर्ट ने उसे ओडिशा में नई तैनाती पर जॉइन करने का निर्देश दिया था।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles