शिशु की देखभाल का मामला: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम की प्रोफेसर की जनगणना ड्यूटी पर लगाई रोक, 10 दिनों में छुट्टी पर फैसले का निर्देश

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आठ महीने के शिशु की देखभाल के लिए बाल देखभाल अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) का आवेदन लंबित होने पर असम की एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर को जनगणना ड्यूटी में तैनात करने के प्रशासनिक आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने सोणितपुर जिले के जिला आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह 10 दिनों के भीतर महिला प्रोफेसर के छुट्टी के आवेदन पर विचार कर उचित फैसला लें।

आवेदन लंबित रहने के बीच मिली जनगणना ड्यूटी

असम के सोणितपुर जिले के बालीपारा स्थित रंगापारा कॉलेज में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर ने 7 दिसंबर 2025 को एक बच्चे को जन्म दिया था। उनके पति राज्य से बाहर नौकरी करते हैं, जिसके कारण आठ महीने के शिशु की देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं पर है और वह इसके लिए एक मेड की मदद लेती हैं।

शिशु को निरंतर देखभाल की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 24 जुलाई 2026 को सोणितपुर के जिला आयुक्त के समक्ष 1 अगस्त से 29 अक्टूबर 2026 तक बाल देखभाल अवकाश स्वीकृत करने के लिए आवेदन दिया था। हालांकि, जिला प्रशासन ने इस आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया।

इसी बीच, कॉलेज के प्राचार्य द्वारा उनका नाम जनगणना कार्य के लिए जिला प्रशासन को भेज दिया गया। इसके बाद सोणितपुर जिला आयुक्त कार्यालय के चार्ज ऑफिसर ने 13 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी कर उन्हें जनगणना 2027 के मकान सूचीकरण और मकान जनगणना चरण के लिए पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) नियुक्त कर दिया। छुट्टी के आवेदन पर निर्णय न होने और जनगणना ड्यूटी का आदेश जारी होने के बाद महिला ने हाईकोर्ट का रुख किया।

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अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एस. बोरा और जे. राजकुमारी ने असम राज्य सरकारी कर्मचारी बाल देखभाल अवकाश नियम, 2025 के नियम 2(c) का हवाला दिया, जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के जैविक या दत्तक बच्चे को नाबालिग परिभाषित किया गया है। वकीलों ने तर्क दिया कि चूंकि आठ महीने के बच्चे को लगातार देखभाल की आवश्यकता है, इसलिए महिला कर्मचारी नियम के अनुसार अवकाश पाने की हकदार हैं और प्रशासन को उनका आवेदन मंजूर करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त वरिष्ठ सरकारी अधिवक्ता जे. के. गोस्वामी ने स्वीकार किया कि सरकारी कर्मचारियों को बाल देखभाल अवकाश लेने का प्रावधान है। हालांकि, उन्होंने 2025 के नियमों के नियम 3(xii) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि इस प्रकार की छुट्टी का दावा पूर्ण अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता है।

हाईकोर्ट का आदेश

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मामले का निपटारा करते हुए जस्टिस नेल्सन सैलो ने याचिकाकर्ता की पारिवारिक स्थिति और उनके पति के बाहर कार्यरत होने के तथ्य पर गौर किया। हाईकोर्ट ने सोणितपुर के जिला आयुक्त को निर्देश दिया कि वे 24 जुलाई के आवेदन में बताई गई व्यावहारिक समस्याओं पर विचार करें और 10 दिनों के भीतर इस पर उपयुक्त आदेश पारित करें।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक जिला आयुक्त द्वारा अवकाश आवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता, तब तक 13 अगस्त का जनगणना पर्यवेक्षक नियुक्ति आदेश निलंबित रहेगा।

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