इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज में ‘गंभीर’ अनियमितताओं के आरोप, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने नोएडा स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज में कथित तौर पर व्याप्त वित्तीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं पर संज्ञान लेते हुए बुधवार को केंद्र सरकार से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है।

चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संस्थान को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस मामले को “गंभीर” बताते हुए संस्थान की पूर्व कुलपति डॉ. मानवी सेठ को भी नोटिस जारी किया है।

एडवोकेट प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इस याचिका में संस्थान के कामकाज के तरीकों पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थित इस संस्थान में भारी अव्यवस्था का माहौल है। मुख्य आरोपों में शामिल हैं:

  • अनधिकृत नियुक्तियां: संस्थान में उचित प्रोटोकॉल और अनिवार्य मंजूरी के बिना कर्मियों की भर्ती की गई।
  • वित्तीय खामियां: वित्त समिति की पूर्व अनुमति के बिना ही बड़े पैमाने पर खर्च किए गए।
  • सरकारी धन का दुरुपयोग: संस्थान के शैक्षणिक कार्यों और विकास के लिए आवंटित सार्वजनिक धन को अन्य कार्यों में डायवर्ट किया गया।
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याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इन अनियमितताओं की गहराई से जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाना अनिवार्य है। इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज या किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा की जानी चाहिए।

जांच की मांग के साथ-साथ, याचिका में संस्थान में स्थाई नेतृत्व की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को संस्थान के लिए एक नियमित और पूर्णकालिक कुलपति (VC) नियुक्त करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने और उसे समय पर पूरा करने का निर्देश दे। याचिका में कहा गया है कि पूर्णकालिक प्रमुख न होने के कारण संस्थान की प्रशासनिक स्थिरता प्रभावित हो रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को इन आरोपों पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। पूर्व कुलपति को सीधे नोटिस जारी करना यह संकेत देता है कि कोर्ट उस कार्यकाल की व्यक्तिगत जवाबदेही की भी जांच कर सकता है जिस दौरान ये कथित अनियमितताएं हुईं।

इस मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई में होगी, जिसमें केंद्र सरकार और UGC संस्थान के शासन और भविष्य के कदमों पर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।

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