दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को पूर्व बीआरएस एमएलसी के. कविता द्वारा अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘तेलंगाना प्रजा जागृति’ के पंजीकरण के लिए दायर आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब कविता पिछले साल भारत राष्ट्र समिति (BRS) से निलंबन के बाद अपना स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार कर रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की बेटी के. कविता को सितंबर 2025 में बीआरएस से निलंबित कर दिया गया था। यह कार्रवाई तब हुई जब उन्होंने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को लेकर अपने चचेरे भाइयों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं—टी. हरीश राव और जे. संतोष कुमार पर अपने पिता की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था।
बीआरएस से अलग होने के तुरंत बाद, कविता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और घोषणा की कि वह अपने स्वयं के राजनीतिक मंच के तहत आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। तब से, वह ‘तेलंगाना जागृति’ के बैनर तले सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रिय हैं, जिसे अब वह ‘तेलंगाना प्रजा जागृति’ के नाम से एक औपचारिक राजनीतिक दल में बदलना चाहती हैं।
कविता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत 23 जनवरी को दिए गए उनके आवेदन पर तेजी से और समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाए।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि चुनाव आयोग द्वारा 23 फरवरी को आवेदन में बताई गई कमियों को दूर कर दिया गया है।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील संजय वशिष्ठ ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि आवेदन पर “जितनी जल्दी हो सके” निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने चार सप्ताह की समय सीमा तय करने के याचिकाकर्ता के अनुरोध का विरोध किया। वकील ने तर्क दिया कि आयोग वर्तमान में देश भर में चुनाव संपन्न कराने की अपनी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में व्यस्त है।
याचिकाकर्ता ने पंजीकरण की तात्कालिकता पर जोर देते हुए बताया कि तेलंगाना में अप्रैल के मध्य में स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। इसके बावजूद, हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कोई निश्चित समय सीमा देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता द्वारा दायर आवेदन पर विचार करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश देते हुए वर्तमान याचिका का निपटारा किया जाता है।”
इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने मामले को वापस चुनाव आयोग के पास भेज दिया है, जिससे ‘तेलंगाना प्रजा जागृति’ के गठन की प्रक्रिया प्रशासनिक शिड्यूल के अनुसार आगे बढ़ सकेगी।

