दिल्ली हाईकोर्ट ने करोल बाग से AAP विधायक विशेष रवि की चुनाव वैधता पर BJP नेता की याचिका बड़ी पीठ को सौंपी

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता योगेंद्र चंदोलिया की उस चुनाव याचिका को बड़ी पीठ के पास भेज दिया जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक विशेष रवि के फरवरी 2020 में करोल बाग विधानसभा सीट से चुनाव को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने सुनवाई के दौरान कहा,

“यह मामला बड़ी पीठ को भेजा जाता है। मैं समन्वय पीठ (coordinate bench) की राय से सहमत नहीं हूं।”

फैसले की विस्तृत प्रति अभी प्रतीक्षित है।

योगेंद्र चंदोलिया, जो 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार थे, ने आरोप लगाया है कि AAP विधायक विशेष रवि ने अपने नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता के संबंध में झूठा हलफनामा दाखिल किया।

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याचिका के अनुसार, रवि ने दावा किया था कि उन्होंने 2003 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जो कथित रूप से गलत है। इस आधार पर याचिकाकर्ता ने चुनाव परिणाम को शून्य घोषित करने की मांग की है।

दिसंबर 2020 में, हाईकोर्ट ने विशेष रवि की उस दलील को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने याचिका को “कारण कारणहीन” बताते हुए खारिज करने की मांग की थी।

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उस वक्त अदालत ने माना था कि याचिका में यह दर्शाया गया है कि AAP विधायक ने अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर समय-समय पर विरोधाभासी दावे किए हैं। न्यायालय ने यह भी कहा था कि यदि कोई उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक योग्यता के संबंध में झूठा दावा करता है, तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की “भ्रष्ट आचरण” की परिभाषा के अंतर्गत आ सकता है।

अब जबकि न्यायमूर्ति प्रसाद ने उक्त मामले को बड़ी पीठ को भेज दिया है, यह मामला न केवल विशेष रवि के चुनाव को प्रभावित कर सकता है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और हलफनामों में सच्चाई के कानूनी मानकों को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करता है।

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