दिल्ली हाईकोर्ट ने पायलटों के साप्ताहिक विश्राम और छुट्टियों पर नए नियमों में डीजीसीए द्वारा दी गई “अनिश्चितकालीन” छूट पर उठाए सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से पूछा कि पायलटों के लिए साप्ताहिक विश्राम और छुट्टियों से जुड़े नए नियमों को वापस लेने का आधार क्या था, खासकर जब यह निर्णय बिना किसी समय सीमा के लिया गया और सभी एयरलाइनों पर लागू होता है। कोर्ट ने DGCA और इंडिगो से दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें DGCA द्वारा 5 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें एयरलाइनों को यह छूट दी गई कि वे पायलटों की छुट्टी को साप्ताहिक विश्राम के तौर पर गिन सकें। यह नियम 1 नवंबर 2025 से लागू हुआ था और इसका उद्देश्य पायलट थकान को रोकना था।

हालांकि, दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो ने देशभर में सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी थीं क्योंकि वह नए ड्यूटी टाइम नियमों को लागू करने के लिए तैयार नहीं थी। इसके बाद DGCA ने इंडिगो को राहत देने के लिए यह नियम वापस ले लिया।

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कोर्ट ने कहा कि DGCA द्वारा उसी दिन दो छूट दी गईं—एक रात की ड्यूटी के नियमों से छूट थी जो 10 फरवरी तक सीमित थी, जबकि दूसरी यानी साप्ताहिक विश्राम और छुट्टी को आपस में बदलने वाले नियम को अनिश्चितकाल के लिए वापस ले लिया गया। इस पर कोर्ट ने सवाल किया:

“अगर आपने दोनों पत्र एक ही दिन जारी किए, और एक की मियाद 10 फरवरी तक है, तो दूसरा अनिश्चितकालीन क्यों? यह पत्र तो स्थायी है। अगर कारण दोनों मामलों में ‘डिसरप्शन’ है, तो एक पर समयसीमा क्यों और दूसरे पर नहीं?”

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कोर्ट ने कहा कि यह छूट एक विशेष एयरलाइन की समस्या के कारण दी गई प्रतीत होती है, जबकि इसका असर सभी एयरलाइनों पर होता है।

DGCA की ओर से पेश वकील ने बताया कि यह निर्णय एक ऑडिट और एयरलाइनों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर लिया गया था, जिसमें पायलटों के विश्राम और छुट्टियों के एक साथ होने की व्यावहारिक समस्याएं सामने आई थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साप्ताहिक विश्राम अभी भी नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के तहत अनिवार्य है, जबकि छुट्टियां एयरलाइन और पायलट के बीच अनुबंध का विषय हैं।

उन्होंने बताया कि रात की ड्यूटी से संबंधित छूट केवल इंडिगो को दी गई थी और वह 10 फरवरी तक सीमित है।

याचिकाकर्ता सबरी रॉय लेंका, अमन मोंगा और किरण सिंह ने आरोप लगाया है कि DGCA ने थकान विरोधी नियमों से अवैध रूप से छूट दी, जो केवल इंडिगो को लाभ पहुंचाने के लिए की गई और यह निर्णय प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण था। याचिका में कहा गया है कि DGCA अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के तहत सभी एयरलाइनों पर नियमों को समान रूप से लागू करने के लिए बाध्य है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि पायलट थकान रोकने वाले नियमों को लागू न करने से जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को “नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट ने DGCA और इंडिगो को दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई अप्रैल में होगी।

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