राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में रिक्तियों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से नियुक्ति प्रक्रिया की समयसीमा सहित बेहतर हलफनामा मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) की रिक्तियों को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया की स्थिति और समयसीमा स्पष्ट करते हुए दो सप्ताह में एक विस्तृत और बेहतर हलफनामा दाखिल करे। आयोग अप्रैल 2023 से पूर्णतः निष्क्रिय है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) की नियुक्तियों को लेकर दाखिल स्थिति रिपोर्ट को “पूरी तरह अस्पष्ट और अधूरी” बताते हुए उसे दो सप्ताह के भीतर एक बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कार्या की पीठ ने कहा:

“यह रिपोर्ट यह नहीं बताती कि मंत्रालय ने नियुक्ति की प्रक्रिया कब शुरू की, प्रक्रिया के क्या-क्या चरण हैं, और अब तक यह कितनी आगे बढ़ी है।”

कोर्ट ने केंद्र सरकार से नियुक्ति की संपूर्ण प्रक्रिया और इसे पूरा करने की निर्धारित समयसीमा के साथ नया हलफनामा दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई की तारीख 27 फरवरी निर्धारित की।

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यह मामला मुजाहिद नफ़ीस द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल 2023 से आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पांचों सदस्यों के पद रिक्त हैं, जिससे यह पूरी तरह “अकार्यक्षम” हो चुका है।

याचिका में कहा गया:

“कार्यपालिका की यह विफलता संसद द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण सांविधिक संस्था को पूरी तरह निष्क्रिय और नेतृत्वविहीन बना चुकी है, जो देश के अधिसूचित अल्पसंख्यकों के संरक्षण और कल्याण के लिए बनाई गई थी।”

इससे पहले 30 जनवरी को भी अदालत ने आयोग में रिक्तियों पर चिंता जताई थी और केंद्र को निर्देश दिया था कि वह सभी रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा हलफनामे में प्रस्तुत करे।

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याचिकाकर्ता ने यह भी प्रार्थना की है कि कोर्ट केंद्र को निर्देश दे कि वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के अनुरूप पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करे — अधिसूचना के चार सप्ताह के भीतर प्रक्रिया पूरी की जाए।

अब यह मामला 27 फरवरी को फिर से अदालत के समक्ष आएगा, जब केंद्र से विस्तृत योजना प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई है।

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