दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में मां की उम्रकैद बरकरार, झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

झारखंड हाईकोर्ट ने अपने दो मासूम बेटों की हत्या की दोषी महिला की अपील खारिज करते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि मामले के तमाम परिस्थितिजन्य साक्ष्य महिला के दोषी होने की ओर ही इशारा करते हैं। अदालत ने 6 अगस्त को दिए अपने फैसले में 2021 के निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें महिला को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत दोषी करार दिया गया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपराध की क्रूरता पर कड़ा रुख अपनाया। पीठ ने कहा कि यह हत्या बेहद गुप्त, क्रूर और बीभत्स तरीके से अंजाम दी गई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि महिला ने बच्चों की मां होने के नाते उनकी रक्षा करने के बजाय एक शैतानी अंदाज में उनकी जान ले ली। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता पूरी घटना को लेकर कोई तार्किक स्पष्टीकरण देने में विफल रही, जिससे उसकी संलिप्तता पूरी तरह साबित होती है।

सजा और कानूनी प्रावधान

हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा महिला को सुनाई गई सश्रम आजीवन कारावास की सजा और 20,000 रुपये के जुर्माने को यथावत रखा है। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में दोषी को छह महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

READ ALSO  केरल हाईकोर्ट ने साइबर उत्पीड़न की शिकायत में राहुल ईश्वर की अग्रिम जमानत का निपटारा किया

घटना और नाले से शवों की बरामदगी

मामले के विवरण के अनुसार, घटना 20 मई 2013 की सुबह सामने आई थी। महिला के पति ने पुलिस को बताया कि सुबह लगभग 6:30 बजे जब वह नहा रहा था, तब एक पड़ोसी ने उसे सूचना दी कि उसकी पत्नी घर के बाहर सड़क पर बदहवास हालत में बैठी है। महिला एक शाम पहले अपने चार साल और दो साल के बेटों के साथ किसी अन्य पुरुष के घर गई थी और रात भर वापस नहीं लौटी थी।

READ ALSO  ₹2,700 करोड़ बैंक धोखाधड़ी मामले में अमटेक समूह के पूर्व अध्यक्ष अरविंद धाम को जमानत से दिल्ली हाईकोर्ट ने किया इंकार

तलाश करने पर दोनों बच्चों के शव पास के ही एक नाले से बरामद हुए। दोनों मासूमों के शरीर महिला की साड़ी में लिपटे हुए थे। पोस्टमार्टम जांच में बच्चों के शरीर पर चोट के निशानों के साथ-साथ उन्हें जहर दिए जाने की पुष्टि हुई थी।

हत्या का मकसद और अभियोजन पक्ष का दावा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला का एक अन्य पुरुष के साथ विवाहेतर संबंध था। वह पुरुष उससे शादी करना चाहता था और महिला के दोनों मासूम बच्चों को अपने रिश्ते के बीच रुकावट मानता था। जांच में यह निष्कर्ष निकला कि महिला ने उस पुरुष के उकसावे पर और उसकी सक्रिय मदद से अपने दोनों बेटों की हत्या कर दी।

बचाव पक्ष के तर्क और हाईकोर्ट का निष्कर्ष

अपील के दौरान महिला के वकील अरविंद कुमार चौधरी ने तर्क दिया कि पूरा मामला केवल परिस्थितियों पर आधारित है और इसका कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। बचाव पक्ष का दावा था कि हत्याएं उस पुरुष ने अकेले की थीं और अपने बच्चों की मौत के सदमे के कारण महिला सड़क पर बेहोश पाई गई थी। वकील ने यह भी कहा कि महिला केवल अपना बकाया कर्ज वापस लेने उस व्यक्ति के घर गई थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पीठ ने नोट किया कि यद्यपि महिला ने बच्चों को उस व्यक्ति के घर ले जाने की बात स्वीकार की है, लेकिन सारा दोष उस पुरुष पर मढ़ने का उसका बयान विश्वसनीय नहीं है। पीठ के अनुसार, बच्चों को जबरन पेप्सी में जहर देकर पिलाने का महिला का बयान पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मेल तो खाता है, लेकिन यह बयान उसने खुद को बेगुनाह साबित करने और अपनी आपराधिक जिम्मेदारी से बचने के लिए सोच-समझकर दिया था।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर में गड़बड़ी करने के आरोपी एक पुलिस अधिकारी की जमानत रद्द कर दी
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles