दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से कहा – मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ मामले की सुनवाई टालें

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह 2020 विधानसभा चुनावों से पहले दिए गए कथित भड़काऊ बयानों से जुड़े मामले में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई को टाल दे।

जस्टिस रविंदर दूदेजा की बेंच ने यह निर्देश तब दिया जब वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी, मिश्रा की ओर से पेश होकर, अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस ने अपनी पूरक चार्जशीट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से प्राप्त दस्तावेज़ शामिल किए हैं। लेकिन ये फाइलें कोडेड और अपठनीय प्रारूप में हैं, जिससे मामले की कार्यवाही को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

जेठमलानी ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में शुक्रवार को आरोप तय करने पर बहस होनी थी, लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ पढ़ने योग्य न होने की स्थिति में सुनवाई समयपूर्व होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ट्रायल कोर्ट आगे बढ़ता है तो मिश्रा की उस अपील का कोई औचित्य नहीं बचेगा जिसमें उन्होंने 7 मार्च के आदेश को चुनौती दी है। उस आदेश में सिटी कोर्ट ने कार्यवाही और समन रद्द करने से इनकार किया था।

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हाईकोर्ट ने दलीलों को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट से कहा कि वह सुनवाई को 13 अक्टूबर के बाद की तारीख पर स्थगित करे। अदालत ने आदेश में कहा, “समय की कमी के कारण आज याचिका पर सुनवाई और निस्तारण संभव नहीं है। इसलिए ट्रायल कोर्ट से अनुरोध है कि आरोप तय करने की सुनवाई इस अदालत द्वारा तय तारीख के बाद किसी दिन के लिए स्थगित की जाए।”

यह कार्यवाही 24 जनवरी 2020 को दर्ज की गई एफआईआर से शुरू हुई थी, जिसमें कपिल मिश्रा पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट की थी।

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7 मार्च को ट्रायल कोर्ट ने मिश्रा की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने कहा था कि उनके कथित बयान “धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाने का एक निर्लज्ज प्रयास” प्रतीत होते हैं।

मिश्रा ने, हालांकि, हाईकोर्ट में दलील दी कि उनके ट्वीट्स में किसी जाति, समुदाय या धर्म का उल्लेख नहीं था, बल्कि केवल पाकिस्तान और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के शाहीन बाग का जिक्र था। उन्होंने कहा कि उनके बयान सीएए-विरोधी आंदोलन की आड़ में माहौल खराब करने वाले तत्वों की निंदा के लिए थे और इनका उद्देश्य न तो नफरत फैलाना था और न ही दुश्मनी को बढ़ावा देना।

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दिल्ली पुलिस ने मिश्रा की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उनके ट्वीट्स में कहीं भी सीएए का उल्लेख नहीं था और उनका मकसद दो धार्मिक समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाना था। 18 मार्च को हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि इससे मिश्रा को कोई नुकसान नहीं होगा।

अब यह मामला 13 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आएगा।

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