दिवाली पर बेची कीड़े लगी बासी सोहन पापड़ी, उपभोक्ता आयोग ने किराना दुकानदार पर लगाया 15 हजार का जुर्माना

त्यौहार के मौके पर ग्राहक को बासी और कीड़े लगी सोहन पापड़ी बेचना एक किराना दुकानदार को भारी पड़ गया। दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने और असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने पर किराना व्यापारी को पीड़ित ग्राहक को 15,000 रुपये का मुआवजा देने तथा मिठाई की कीमत 7 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है।

आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव, सदस्य डॉ. राजिंदर धर और रितु गरोड़िया की पीठ ने टिप्पणी की कि उपभोक्ताओं को बाजार से सुरक्षित, ताजा और उचित रूप से लेबल किए गए खाद्य उत्पाद प्राप्त करने का वैध अधिकार है। बासी या खराब भोजन की आपूर्ति करना खरीदारों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

पीठ ने किराना स्टोर (ओपी-1) को आदेश दिया कि वह सोहन पापड़ी के मूल्य के रूप में 1,250 रुपये, खरीद की तारीख 26 अक्टूबर 2024 से भुगतान के दिन तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके अतिरिक्त, दुकानदार को 15,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने कहा कि इस आदेश का पालन 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समयसीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो पूरी राशि पर 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज लागू होगा।

मैनिफैक्चरिंग तारीख में हेरफेर और घटिया गुणवत्ता

यह मामला 26 अक्टूबर 2024 का है, जब एक स्थानीय निवासी ने दिवाली उपहार के रूप में कर्मचारियों को बांटने के लिए संबंधित किराना दुकान से लगभग एक दर्जन ड्राई फ्रूट्स के पैकेट और सोहन पापड़ी के 45 डिब्बे खरीदे थे। जब इन पैकेटों को बांटा गया, तो मिठाई से तेज दुर्गंध आ रही थी। पैकेट खोलने पर मिठाई सड़ चुकी थी, चूर-चूर हो गई थी और उसमें कीड़े तैर रहे थे।

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जांच में यह भी सामने आया कि मिठाई के डिब्बों पर छपी मूल मैनिफैक्चरिंग तारीख को जानबूझकर मिटा दिया गया था और उसकी जगह 2024 की नई तारीख दर्ज कर दी गई थी। इससे ग्राहक उत्पाद की ताजगी और उसकी शेल्फ लाइफ की जांच करने के अवसर से वंचित रह गया।

दुकानदार और निर्माता पक्ष रखने में रहे विफल

मिठाई खराब निकलने के बाद ग्राहक ने दुकानदार से संपर्क किया। दुकानदार ने पैकेट बदलने का आश्वासन दिया लेकिन बाद में मुकर गया। इसके बाद पीड़ित ग्राहक ने साक्ष्य के रूप में कुछ डिब्बों को संभाल कर रखा, कर्मचारियों को देने के लिए अपनी जेब से नए उपहार खरीदे और दिल्ली स्वास्थ्य विभाग व निर्माता कंपनी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

आयोग में दायर अपनी याचिका में पीड़ित ने 5,625 रुपये की वापसी, नए उपहारों पर हुए खर्च की भरपाई, मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा, अदालती खर्च और सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के एवज में 1 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

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सुनवाई के दौरान किराना स्टोर का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण आयोग ने उसके खिलाफ एकतरफा (एकस्पार्टे) कार्रवाई की। वहीं, मिठाई निर्माता कंपनी द्वारा प्रस्तुत किया गया लिखित उत्तर कानूनी रूप से निर्धारित समयसीमा के बाद जमा किया गया था, इसलिए उसे अदालत के रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया। साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत तस्वीरों में मिठाई पूरी तरह से नष्ट और उपभोग के अयोग्य पाई गई, जिसके आधार पर आयोग ने किराना स्टोर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार आचरण का दोषी ठहराया।

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