कोरोना संक्रमण से जान गंवाने पर चार लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने पर विचार कर रही है सरकार, जाने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा

नई दिल्ली— सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार ने बताया है कि कोरोना संक्रमण से हुई मौतों के मामले में वह पीड़ित परिवार को 4 लाख मुआवजा देने और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की नीति पर विचार विमर्श कर रही है। इस संबंध में केंद्र ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दस दिनों का वक्त मांगा है। कोर्ट ने 21 जून तक सुनवाई को टाल दिया है। 

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में केंद्र सरकार को तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस याचिका को विरोध में नही ले रही है। मामले पर सहानुभूति पूर्वक विचार चल रहा है। जवाबी एफिडेविट दाखिल करने के लिए दो हफ़्तों का समय दे दिया जाय।

पीठ ने कहा कि देश के कुछ राज्यों ने इसे लागू भी किया है। उन्होंने न्यूज़ में पढ़ा है कि बिहार सरकार ने चार लाख मुआवजे का एलान किया है। लेकिन अधिकांश राज्यों ने अपनी नीति नही निर्धारित की है। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। पीठ ने जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र की ओर से दो हफ़्तों के समय की मांग किये जाने पर कहा कि उन्होंने पहले नोटिस जारी किया था। इतना वक्त क्यों चाहिए।

तुषार मेहता ने कहा कि अन्य चीजों में व्यस्तता के कारण समय लग गया लेकिन पीठ ने कहा कि फो हफ्ते नही 10 दिनों में जवाब दाखिल करिए। कोर्ट नव मामले को 21 जून को दोबारा सुनवाई का निर्देश देते हुए सरकार से कहा कि वह दाखिल किए जाने वाले हलफनामे की कॉपी दो दिन पहले शनिवार को ही याचिकाकर्ताओं को देगी।

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इस दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि मृत्यु प्रमाणपत्र में मौत का कारण न दिए जाने के कारण भी काफी दिक्कतें आती है। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार चल रहा है। 

याचिका में यह कि गई मांग—- सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दो याचिकाएं लंबित है। वक अधिवक्ता गौरव बंसल की दूसरी वकील रिपक कंसल ने दाखिल कर कोरोना से मंरने वालों के परिजनों को चार लाख रुपये मुआवजा या अनुग्रह राशि दी जाने की मांग की है। 

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