‘दूरी अब बाधा नहीं’: सीजेआई सूर्या कांत ने सिक्किम को देश की पहली पेपरलेस स्टेट ज्यूडिशियरी घोषित किया

भारतीय न्यायिक ढांचे में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने शुक्रवार को सिक्किम को देश की पहली पेपरलेस (कागज रहित) राज्य न्यायपालिका घोषित किया। ‘प्रौद्योगिकी और न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल उपकरणों का समावेश भौगोलिक और वित्तीय बाधाओं को प्रभावी ढंग से समाप्त कर रहा है, जो लंबे समय से वादियों के लिए परेशानी का सबब रही हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने उल्लेख किया कि भारतीय कानूनी परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया है। अब हम उस दौर से बाहर निकल चुके हैं जहाँ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भौतिक फाइलों और कागजों के ढेर में दबे रहते थे। उन्होंने वर्तमान स्थिति को एक “जीवंत डिजिटल इकोसिस्टम” बताया, जहाँ ई-कोर्ट्स (e-Courts) परियोजना ने आम नागरिक और कानून के बीच के रिश्ते को मौलिक रूप से फिर से परिभाषित किया है।

सीजेआई ने कहा, “जब हम देशभर में न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक को जोड़ने की बात करते हैं, तो वास्तव में हम उन भौगोलिक बाधाओं को दूर कर रहे होते हैं जो कठिन इलाके, वित्तीय सीमाओं या अत्यधिक दूरी के कारण पैदा होती हैं।”

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पिछले दशक की चुनौतियों को याद करते हुए, सीजेआई ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की कठिनाइयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “विशाल हिमालय जितना भव्य है, वहाँ आवाजाही उतनी ही धीमी और अनिश्चित होती है। यदि हम एक दशक पहले की स्थिति देखें, तो न्याय की तलाश में किसी सिक्किमी वादी के लिए दूरी किलोमीटर में नहीं, बल्कि संकरे रास्तों और अनिश्चित मौसम के बीच यात्रा के दिनों में मापी जाती थी।”

मुख्य न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि डिजिटल सुधार केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि कानून के शासन को बनाए रखने के लिए एक व्यावहारिक आवश्यकता है। उन्होंने नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) को न्यायिक प्रदर्शन की “धड़कन” बताया और जजों के चैंबर में “इंटेलिजेंट असिस्टेंस” (एआई सहायता) के आगमन पर खुशी जताई।

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उन्होंने विशेष रूप से दो एआई टूल का उल्लेख किया:

  • SUVAS (सुवास): यह टूल अदालती फैसलों के त्वरित अनुवाद के लिए बनाया गया है।
  • SUPACE (सुपेस): यह एक एआई टूल है जो जजों को तेजी से और व्यापक कानूनी शोध करने में मदद करता है।

सीजेआई कांत ने समझाया, “ये नवाचार ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में कार्य करते हैं… वे जज को नियमित और यांत्रिक कार्यों के बोझ से मुक्त करते हैं, जिससे वे कानून की जटिलताओं में अधिक गहराई से उतर पाते हैं।”

सीजेआई ने गौर किया कि तकनीक सफलतापूर्वक अदालत के भीतर ‘पावर डायनेमिक्स’ को बदल रही है। दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले वादी अब बिना किसी बिचौलिए के अपने मामले की प्रगति देख सकते हैं, आदेश पढ़ सकते हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के किसी भी कोने से वकील की सेवाएं ले सकते हैं। इससे पूरी प्रणाली अधिक सुलभ और पारदर्शी हो गई है।

हालांकि, सीजेआई ने आगाह किया कि यह कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में नेशनल कोर केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (NC CIS) के माध्यम से हासिल किए गए डिजिटलीकरण को हाईकोर्ट और उच्च न्यायपालिका में भी पूरी तरह लागू करने का आह्वान किया।

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भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने सभी हाईकोर्ट्स में मानकीकरण (Standardization) की आवश्यकता पर बल दिया। इससे राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मानक स्थापित होंगे, जबकि स्थानीय भाषाओं और विशिष्ट प्रक्रियाओं की जरूरतों का भी ध्यान रखा जा सकेगा।

इसके अलावा, उन्होंने ई-सेवा केंद्रों (e-Seva Kendras) के विस्तार की वकालत की। ये डिजिटल सेवा केंद्र वकीलों और वादियों को ई-फाइलिंग, प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने, ई-पेमेंट करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने में मदद करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि “डिजिटल डिवाइड” न्याय की राह में रोड़ा न बने।

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