छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व CMO अधिकारी सौम्या चौरसिया को ED और EOW मामलों में हाईकोर्ट से जमानत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को कथित शराब घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के मामलों में जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने 24 फरवरी को आदेश सुरक्षित रखने के बाद शनिवार को यह राहत प्रदान की।

ED के अनुसार यह कथित घोटाला वर्ष 2019 से 2023 के बीच हुआ, जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी। एजेंसी का आरोप है कि एक आपराधिक गिरोह ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत कर सरकारी शराब दुकानों में अवैध शराब की आपूर्ति की और बिक्री पर अवैध कमीशन वसूला, जिससे राज्य को लगभग ₹2,883 करोड़ का नुकसान हुआ।

EOW ने 17 जनवरी 2024 को आपराधिक पहलुओं की जांच के लिए FIR दर्ज की थी, जबकि ED ने 11 अप्रैल 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए ECIR दर्ज किया।

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EOW की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि चौरसिया ने CMO में अपने प्रभावशाली पद का उपयोग कर कथित सिंडिकेट की गतिविधियों को संचालित और सुगम बनाया। उनके अनुसार जांच में डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जो उन्हें साजिश के “केंद्र” में रखते हैं।

ED ने भी आरोप लगाया कि चौरसिया को कथित रूप से ₹43.50 करोड़ की आपराधिक आय प्राप्त हुई और लगभग ₹115.5 करोड़ की राशि के लेनदेन में उनकी भूमिका रही। एजेंसी ने कहा कि व्हाट्सऐप चैट साक्ष्य के रूप में मान्य हैं और बरामदगी का अभाव जमानत का आधार नहीं हो सकता।

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनकी मुवक्किल का नाम न तो FIR में है और न ही चार्जशीट में, उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और गिरफ्तारी अनावश्यक थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ED का मामला सह-आरोपियों के बयानों पर आधारित है, जांच पूरी हो चुकी है और मुकदमे में लंबा समय लगने की संभावना है।

EOW मामले में अदालत ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई जल्द शुरू होने या समाप्त होने की संभावना नहीं है और जांच लंबी चलेगी, ऐसे में निरंतर हिरासत न्यायोचित नहीं है।

ED मामले में भी अदालत ने माना कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और अभियोजन का मामला मुख्यतः बयानों तथा अनुमानात्मक आरोपों पर आधारित है, जिनकी साक्ष्यात्मक जांच ट्रायल के दौरान होगी।

अदालत ने समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के 9 फरवरी के आदेश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें चौरसिया के मामले पर पैरिटी के आधार पर विचार करने को कहा गया था।

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साथ ही, अदालत ने यह भी नोट किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही उन्हें कोयला लेवी और DMF मामलों में जमानत दे चुका है, इसलिए वर्तमान मामले में निरंतर हिरासत समानता के स्थापित सिद्धांत के अनुरूप नहीं होगी।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चौरसिया के खिलाफ विभिन्न एजेंसियों द्वारा छह बार गिरफ्तारी की गई है, जिससे उनकी कुल हिरासत अवधि काफी बढ़ी है। उन्हें पहली बार वर्ष 2022 में कथित कोयला लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया गया था।

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जमानत मिलने के बाद अब इन मामलों में ट्रायल आगे बढ़ेगा, जहां अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

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