बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: “कहीं और नहीं रहते आप”, वायु प्रदूषण पर लापरवाही के लिए नगर आयुक्तों की सैलरी रोकने की चेतावनी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई और नवी मुंबई के नगर निगमों को वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए दिए गए आदेशों की अनदेखी पर सख्त फटकार लगाई और चेतावनी दी कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो दोनों नगर आयुक्तों की सैलरी रोक दी जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की खंडपीठ ने कहा कि नगर निकायों ने कोर्ट के आदेशों का “आक्रामक उपेक्षा” के साथ उल्लंघन किया है।

“हम (नगर आयुक्तों की) सैलरी रोक देंगे। इसे चेतावनी समझिए,” कोर्ट ने कहा।
“आप लोग कहीं और नहीं रह रहे, हम सब एक ही हवा में सांस ले रहे हैं।”

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बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. यू. कामदार ने बताया कि कई निर्माण स्थलों पर काम रोकने के नोटिस जारी किए गए हैं और करीब 600 में से 400 साइट्स पर वायु गुणवत्ता निगरानी यंत्र लगाए गए हैं।

हालांकि अदालत इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और कहा:

“आप इतने सालों से क्या कर रहे थे? कोर्ट का काम नगर निगम चलाना नहीं है।”

कोर्ट ने बीएमसी को नवंबर 2025 से पहले के तीन महीनों का वायु गुणवत्ता से जुड़ा संवेदी डेटा सौंपने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि उसे वास्तविक आँकड़े चाहिए, जो सच्ची तस्वीर सामने लाएंगे।

बीएमसी और नवी मुंबई नगर निगम द्वारा दायर किए गए शपथपत्रों में वॉर्ड-वार विवरण का अभाव होने पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई और कहा कि इन निकायों की तरफ से वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर “कोई ईमानदार और गंभीर कोशिश नहीं दिखती”।

हाईकोर्ट ने 2023 में बढ़ते वायु प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से यह मामला कोर्ट की निगरानी में चल रहा है।

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हाल के महीनों में मुंबई और उपनगरों में प्रदूषण का स्तर और अधिक बिगड़ा है, जिससे अदालत की चिंता और कड़ी हो गई है।

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को तय की है, जिसमें नगर निकायों की कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।

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