आईएनएस शिक्रा के पास हाई-राइज पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, नौसेना की “इंटेलिजेंस विफलता” पर सवाल; एनओसी जरूरी हुई तो अतिरिक्त हिस्से के ध्वस्तीकरण की चेतावनी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आईएनएस शिक्रा के निकट बन रही एक ऊंची इमारत को लेकर भारतीय नौसेना को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि प्रथम दृष्टया यह “इंटेलिजेंस की विफलता” का मामला प्रतीत होता है, क्योंकि वर्षों तक निर्माण कार्य पर ध्यान नहीं दिया गया।

न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ आईएनएस शिक्रा के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संवेदनशील नौसैनिक एयर स्टेशन की सुरक्षा का हवाला देते हुए निर्माण रोकने की मांग की गई थी।

पीठ ने कहा कि नौसेना ने तब आपत्ति उठाई जब इमारत लगभग 70 मीटर (करीब 19 मंजिल) तक बन चुकी थी।

अदालत ने टिप्पणी की, “आप अपने गंभीर चूक को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं… यह इंटेलिजेंस और सुरक्षा में विफलता है। नौसेना अपने दफ्तर में बैठी रही और 2024 तक 70 मीटर निर्माण होने के बाद इस पर ध्यान दिया।”

पीठ ने आश्चर्य जताया कि इतने वर्षों तक एक ऊंची इमारत का निर्माण कैसे नजरों से ओझल रहा।

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अदालत ने यह भी पूछा कि जब आईएनएस शिक्रा के आसपास कई अन्य ऊंची आवासीय इमारतें मौजूद हैं, जिनमें कुछ “पत्थर फेंकने की दूरी” पर हैं, तो केवल इसी परियोजना पर आपत्ति क्यों की गई।

डेवलपर द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों का अवलोकन करते हुए अदालत ने कहा कि निर्माणाधीन इमारत और नौसैनिक अड्डे के बीच कई अन्य हाई-राइज मौजूद हैं और प्रथम दृष्टया उस स्थान से बेस दिखाई भी नहीं देता।

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अदालत ने कहा, “यदि खतरे की आशंका है तो वह उन इमारतों पर भी लागू होती है, लेकिन नौसेना ने उनके खिलाफ कुछ नहीं किया।”

नौसेना ने 2011 की रक्षा मंत्रालय अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें रक्षा प्रतिष्ठानों के पास ऊंचे निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) अनिवार्य किया गया था।

वहीं डेवलपर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास ने कहा कि परियोजना को मार्च 2011 में ही प्रारंभ प्रमाणपत्र मिल गया था, जो उक्त अधिसूचना से पहले का है, इसलिए एनओसी की आवश्यकता नहीं थी।

अदालत ने निर्माण पर लगी पूर्व अंतरिम रोक जारी रखने से इनकार किया और कहा कि वह आदेश केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मुंबई यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से दिया गया था।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अनुमत 53.07 मीटर (15 मंजिल) तक का निर्माण जारी रह सकता है, लेकिन इसके ऊपर किया गया निर्माण डेवलपर के जोखिम पर होगा।

अदालत ने कहा कि यदि अंतिम सुनवाई में यह पाया गया कि एनओसी आवश्यक थी, तो 53 मीटर से ऊपर बने हिस्से को गिराने का आदेश दिया जाएगा।

हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यह पाया गया कि मुंबई महानगरपालिका ने नौसेना से एनओसी लिए बिना प्रारंभ प्रमाणपत्र जारी किया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।

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