₹640 करोड़ साइबर फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत से इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन में सरेंडर का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने ₹640 करोड़ के कथित साइबर फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और उसे 10 दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई थी।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 2 फरवरी को पारित दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें भास्कर यादव और अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।

हाईकोर्ट ने अपने 22 पन्नों के निर्णय में कहा था कि मामले में “मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल जाल” सामने आता है और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की मांग अनुचित नहीं है।

अदालत ने कहा था कि आरोपित पेशेवर होने के कारण कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को कई स्तरों पर घुमाकर छिपाने की योजना बनाई गई है और इसकी तह तक जाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन इस मामले में आम लोगों, विशेषकर मध्यम वर्ग के निवेशकों से धोखे से प्राप्त धन को जटिल तरीके से इधर-उधर किया गया है।

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व्यक्तिगत स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताते हुए भी हाईकोर्ट ने कहा था कि गंभीर आर्थिक अपराधों में प्रभावी जांच की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया था कि आरोपियों पर जांच अधिकारियों के साथ मारपीट, स्थानीय पुलिस को रिश्वत देने का प्रयास तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट करने के आरोप लगे हैं, जो अग्रिम जमानत के खिलाफ जाते हैं।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो एफआईआर से उत्पन्न हुई है, जिनमें लगभग ₹640 करोड़ के साइबर फ्रॉड की जांच की जा रही है।

एजेंसी का आरोप है कि:

  • बेटिंग, जुआ, फर्जी पार्ट-टाइम जॉब और फिशिंग के जरिए लोगों से धन ठगा गया,
  • इस धन को भारत के 5,000 से अधिक म्यूल बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया,
  • बाद में इसे यूएई स्थित पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर किया गया, और
  • कुछ राशि दुबई में भारतीय बैंकों द्वारा जारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से नकद निकाली गई।
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ईडी ने यह भी कहा है कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी और क्रिप्टो ट्रेडर्स के एक नेटवर्क के जरिए की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और भास्कर यादव को 10 दिन के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया, ताकि जांच एजेंसी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सके।

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